भयमुक्त बेटी, सशक्त समाज: नवरात्रि का सच्चा सन्देश – -डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’

भयमुक्त बेटी, सशक्त समाज: नवरात्रि का सच्चा सन्देश – -डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’
नवरात्रि पर्व शक्ति, साधना और नारी स्वतंत्रता का वास्तविक स्वरूप माना जाता है। विचार यह उठता है कि नवरात्रि में कन्याओं के पाँव पखारने से पहले, पंखों को उड़ने की आज़ादी देनी चाहिए ?! जब समाज की हर बेटी भयमुक्त होगी, तभी माँ जगदम्बा की सच्ची पूजा होगी।क्या केवल नौ दिनों तक़ माँ दुर्गा के पंडालों सजाने और कन्या पूजन करने से हमारी संस्कृति का उद्देश्य पूरा हो जाता है? नवरात्रि का पर्व मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति, साहस और स्वावलंबन का जीवंत संदेश है। माता जगदम्बा को आदिशक्ति कहा जाता है ; वह महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का वह स्वरूप हैं जो अन्याय का नाश करती हैं और सृजन का मार्ग प्रशस्त करती हैं। लेकिन यह विडंबना ही है कि एक ओर हम समाज में देवी की पूजा करते हैं, और दूसरी ओर हमारी ही बेटियां असुरक्षा, डर और रूढ़ियों के अंधेरे में जीने को विवश हैं। जिस समाज में नारी भय के साये में जीती हो, वहाँ की गई पूजा केवल दिखावा बनकर रह जाती है। वास्तविक नवरात्रि तभी सार्थक होगी जब हम बेटियों के पैरों में पड़ी पाबंदियों की बेड़ियों को काट कर उन्हें आसमान छूने के पंख देंगे। उन्हें शिक्षा, समान अवसर और अपने निर्णय ख़ुद लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। जब हमारी हर बेटी बिना किसी भय के अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेगी, तभी माँ जगदम्बा की सच्ची आराधना होगी। आइए, इस नवरात्रि केवल मूर्तियों की पूजा न करें, बल्कि अपने आसपास की हर बेटी के सम्मान, सुरक्षा और स्वतंत्रता की रक्षा का संकल्प लें।
-डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’




