Uncategorized
-
पिंजरा सोने का था, पर पंछी प्यासा था: राजा आहिल और रानी नैना की कथा– नरसा राम जांगु डीडवाना_कुचामन
जो नदी को बाँधने निकले थे, वे खुद ही डूब गए — और जो उसे रास्ता दे गए, वे…
Read More » -
मटके का पानी – रमेश शर्मा
एक समय था लोगों के पास पैसा कम था। लेकिन व्यवहारिकता थी। व्यक्ति थोड़े में सुखी था। धरम करम पर…
Read More » -
खामोशी की गूंज – डॉ इंदु भार्गव जयपुर
बरसों बाद आज फिर उस पुराने घर का दरवाज़ा खुला था। आँगन वैसा ही था, तुलसी का चौरा भी…
Read More » -
संस्मरण: मुसीबतों के काले बादल लेखक: राजेश कुमार ‘राज’
बात वर्ष 2023 के जुलाई माह की है। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में मेरा बवासीर का ऑपरेशन हुआ।…
Read More » -
निजी स्वार्थ के कारण घटते संस्कार – प्रवीणा सिंह राणा “प्रदन्या”
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और संस्कार उसके जीवन की अमूल्य धरोहर हैं। संस्कार ही उसे सही और गलत…
Read More » -
महर्षि अरविन्द का दर्शन -डो.दक्षा जोशी ‘निर्झरा’ अहमदाबाद, गुजरात।
महर्षि अरविन्द का ‘पूर्णयोग’ संसार से पलायन का नहीं, बल्कि पृथ्वी के दिव्यीकरण का दर्शन है। पारंपरिक वेदांत के…
Read More » -
स्वार्थ की दौड़ में खोती मानवता – सुमन दूबे साऊंखोर बड़हलगंज गोरखपुर
आज का युग भौतिक सुख-सुविधाओं और प्रतिस्पर्धा का युग बन गया है। अधिकांश लोग धन, शोहरत और व्यक्तिगत सफलता प्राप्त…
Read More » -
गुलमोहर – शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’
उस दिन फरवरी की हल्की ठंड थी। कॉलेज की पुरानी लाइब्रेरी हमेशा की तरह शांत थी, बस पन्ने पलटने…
Read More » -
लघुकथा:- किस्मत का खेल लघुकथा- श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर-गुजरात)
किस्मत का खेल भी बड़े अजीब होते हैं।भाग्य और तकदीर की उतार चढ़ाव ही है किस्मत का खेल।जीवन कब…
Read More » -
पुरुषोत्तम की महिमा – सुनीता तिवारी सरस – बाल लघु कथा
एक छोटे से गाँव में मोहन नाम का बालक रहता था। वह बहुत जिज्ञासु था और हमेशा अपने दादा…
Read More »