माँ दुर्गा अष्टमी एवं नवरात्रि का वास्तविक अर्थ ,आज के समाज को समझने की आवश्यकता ।

आज समाज को नवरात्रि के वास्तविक अर्थ को समझने की आवश्यकता है। माँ दुर्गा की आराधना तभी सार्थक होगी, जब हम अपने जीवन में नारी का सम्मान करेंगे, बेटियों को समान अधिकार देंगे, अन्याय के विरुद्ध खड़े होंगे और समाज में प्रेम, करुणा, समानता तथा मानवीय मूल्यों को स्थापित करेंगे।
माँ दुर्गा के नौ स्वरूप हमें जीवन के अलग-अलग आदर्शों की प्रेरणा देते हैं। उनका संदेश है कि शक्ति का अर्थ केवल सामर्थ्य नहीं, बल्कि निर्बलों की रक्षा करना, अन्याय का विरोध करना और सत्य के मार्ग पर चलना है।
यदि हम माँ की पूजा तो करें, लेकिन अपने व्यवहार में महिलाओं का अपमान करें, बेटियों के अधिकारों की अनदेखी करें या अन्याय के सामने मौन रहें, तो हमें नवरात्रि के मूल संदेश पर पुनर्विचार करना चाहिए।
सच्ची आराधना वही है, जिसमें आस्था के साथ आचरण भी पवित्र हो; जहाँ देवी की पूजा के साथ नारी का सम्मान हो और धर्म के साथ मानवता का पालन हो।
इन लेखों का उद्देश्य केवल धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज को माँ दुर्गा, अष्टमी और नवरात्रि के वास्तविक आध्यात्मिक, नैतिक एवं सामाजिक अर्थ से परिचित कराना है।
समर्पण
मेरी पूजनीय माँ श्रीमती सूरज देवी को सादर समर्पित।
माँ के संस्कार, स्नेह, त्याग और आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। उन्हीं के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए ये लेख समर्पित हैं।
माँ आज 19 अक्टूबर !
आपका बेटा दीपक शर्मा




