लघु कथा: समय का फेर – श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर गुजरात)

“समय समय बलवान नहीं पुरुष बलवान,
काबा ने अर्जुन को लूटा वो ही धनुष वो ही बान।” अर्जुन जी तीरंदाजी में कुशल था।वो ऐसा योद्धा था उसको कोई हरा नहीं सकता था।वो अकेला सबको भारी पड़ता था।मगर उस का समय फेर हो गया तो एक काबा नाम का व्यक्ति ने उसको हरा दिया था।व्यक्ति महान नहीं होता समय बलवान होता है।
छोटे से गांव में शंकर नाम का एक लड़का रहता था।कच्चे घर में सिर्फ उसके मां ही रहती थी। पिता के निधन के बाद घर की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर आई। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी की कई बार दो वक्त की रोटी नहीं मिलती थी।उस की मां वृद्ध हो गई थी। कुछ भी काम नहीं कर सकती थी। एक बार उस की मां भी इस दुनिया छोड़कर चल बसी। अब शंकर अकेला बेबस हो गया। करें तो क्या करें।
गांव के लोगों के खाने के बदले में वो काम करता था। शंकरिया यह काम कर देना वो काम कर देना तभी तुझको खाना मिलेगा।शंकर चुपचाप सब काम कर देता था। शंकर ने सोचा;’मेरी जिंदगी ऐसे नहीं कटेगी’।मुझे कुछ करना होगा। गांव में एक जमींदार था उस से जाकर मिला।जमींदार को कहा;’ मुझे आपका एक खेत मजदूरी करने के लिए दो।’मैं अच्छी मजदूरी करूंगा।उसमें आपको जो अच्छा लगे हिस्सा देना।शंकरने तन तोड़ मेहनत की। संघर्ष किया। रात दिन एक की। इसके बदले में अच्छी आमदनी आई। उसमें से शंकर ने एक खेत लिया। धीरे धीरे संघर्ष करता गया और एक दिन वो जमींदार बन गया।
एक दिन उसने सोचा तो ऐसा लगा समय ने उसका रूप नहीं उसका व्यक्तित्व ही बदल दिया।जो सिर्फ खाने के बदले में काम करता था।शंकरीया का कह कर बुलाते थे।आज शंकरलाल बन गया।समय जब कमजोर था तब मेरी यह स्थिति थी।आज समय मेरे पक्ष में है। समय ने मुझे मजबूत बना दिया।सच में समय ही बलवान है। जब समय अच्छा हो कोई भी काम सरल हो जाता है। आपका समय विपरीत हो आपको अफलता मिलती है। सचमुच समय की गति बहुत न्यारी है।
“वक्त वक्त की बात है वक्त नहीं जब साथ,
जो थे हरदम साथ अब,वही छूड़ाते हाथ।”
श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर गुजरात)




