Uncategorized
अंतःकरण – सरिता चौहान गोरखपुर उत्तर प्रदेश

मेरी अंतःकरण में हर वक्त गुजरता रहता है
मां की ममता पिता का दुलार
और साथ ही साथ आजादी की हुंकार
जीवन की विसंगतियां और सामाजिक विषमताएं
सब एक साथ अंतरद्वंद्व फैलती हैं।
किसे छोड़ूं या क्या वर्णन करूं।
जीवन का इस संसार में कोई मोल है भी ये पता नहीं।
पर विसंगतिया जीने नहीं देतीं,
विसंगतियों के साथ विषमताएं भी
फैलाकर बाहें एक दूसरे के हृदय से लग जाती हैं।
जीवन का सच कोई समझना ही नहीं चाहता।
अपने लिए अमृत और दूसरे के लिए जहर घोलने वाले दुनिया वालों से दूर,
इस जद्दोजहद में फंसने से अच्छा,
अपनी अंतःकरण की दुनिया में,
जीना अच्छा समझने लगी हूं।
सरिता चौहान
गोरखपुर उत्तर प्रदेश




