साहित्य संगम मंच की मासिक काव्य गोष्ठी में मना अलका गर्ग का जन्मोत्सव, कविता, ग़ज़ल और हास्य से सजी साहित्यिक संध्या

जयपुर, 17 जुलाई। साहित्य संगम मंच द्वारा आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी शुक्रवार को साहित्यिक गरिमा, आत्मीयता और उत्साह के साथ संपन्न हुई। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मंच की उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ साहित्यकार अलका गर्ग का जन्मोत्सव रहा, जिसे सभी साहित्यकारों ने प्रेम और सम्मान के साथ मनाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच की संस्थापिका शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ ने की, जबकि मंच अध्यक्ष सुनीला नारंग ने प्रभावशाली संचालन किया। शुभारंभ सुनीता तिवारी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ।गोष्ठी में सीमा पुरबा ने अलका गर्ग के व्यक्तित्व पर आधारित कविता तथा नारी सम्मान और हास्य से ओतप्रोत रचनाएँ प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। मैत्रेयी त्रिपाठी ने अलका गर्ग को अपना प्रेरणास्रोत बताते हुए भावपूर्ण काव्य-पाठ किया। प्रभात झा ने साहित्य साधना और मानवीय संबंधों पर केंद्रित रचनाएँ सुनाईं।
सुनीता तिवारी ने जन्मोत्सव पर शुभकामना गीत और ग़ज़ल प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया। रुक्मिणी शर्मा ने जन्मदिन और सावन की ऋतु पर आधारित कविताओं से वातावरण को उल्लासमय बना दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ ने अलका गर्ग के साहित्यिक योगदान, नेतृत्व, स्नेह और व्यक्तित्व पर आधारित विस्तृत काव्यांजलि प्रस्तुत करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सतत सृजनशीलता की कामना की। उन्होंने अपनी ग़ज़ल और प्रेरणादायी गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। सुनीला नारंग की चर्चित हास्य कविता साठ के आते-आते ने उपस्थित साहित्यकारों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। जन्मोत्सव से भावविभोर अलका गर्ग ने सभी साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपनी हास्य रचना से समापन सत्र को यादगार बना दिया। कार्यक्रम के अंत में सुनीला नारंग ने जन्मदिन गीत प्रस्तुत किया, जिसके साथ पूरे वातावरण में आत्मीयता, स्नेह और उल्लास का रंग बिखर गया। साहित्य, संगीत, ग़ज़ल, हास्य और संवेदनाओं से सजी यह मासिक काव्य गोष्ठी सभी प्रतिभागियों के लिए अविस्मरणीय बन गई। मंच परिवार ने अलका गर्ग को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य एवं निरंतर साहित्य-सृजन की कामना की।




