लेख – श्राद्ध का महत्व – सुनीता तिवारी”सरस”

लेख – श्राद्ध का महत्व – सुनीता तिवारी”सरस”
श्राद्ध भारतीय सनातन परंपरा में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का महत्वपूर्ण अवसर है। ‘श्राद्ध’ शब्द ‘श्रद्धा’ से बना है, जिसका अर्थ है विश्वास और सम्मान के साथ अपने पितरों का स्मरण करना। पितृ पक्ष में लोग अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं।
श्राद्ध के दौरान तर्पण, पिंडदान और भोजन आदि परंपराएँ निभाई जाती हैं। इन कर्मों के पीछे मुख्य भावना यह है कि जिन पूर्वजों ने हमें जीवन, संस्कार और परिवार की परंपराएँ दीं, उनके प्रति हम अपनी कृतज्ञता व्यक्त करें। इस अवसर पर ब्राह्मणों के साथ-साथ जरूरतमंदों, पशु-पक्षियों और अन्य जीवों को भोजन कराने की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है।
श्राद्ध केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम भी है। यह हमें अपने अतीत से जोड़ता है और यह स्मरण कराता है कि हमारा वर्तमान अनेक पीढ़ियों के त्याग और योगदान की देन है।
आज के बदलते समय में भी श्राद्ध का मूल संदेश प्रासंगिक है, पूर्वजों का सम्मान करें, उनके सद्गुणों को जीवन में अपनाएँ और जरूरतमंदों की सेवा करें। यही सच्ची श्रद्धांजलि है।
सुनीता तिवारी”सरस”




