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जीवन जीने की कला –शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’
जीवन केवल साँसों की आवाजाही नहीं है। यह एक सुंदर अवसर है ,स्वयं को समझने, महसूस करने, और उस…
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नारी शोषण क्यों –डॉ मीरा कनौजिया काव्यांशी
नारीआज के युग में कंधे से कंधा मिलाकर पुरुषों के साथ चल रही है। किंतु आज भी नारी दहेज…
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सन्घर्ष से सफलता तक-उर्मिला मोर बरहामपुर ओडीसा
सन्घर्ष से सफलता तक उसका नाम था लक्ष्मी आंखें खोलने के साथ ही उसने अपने घर में दरिद्रता का…
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“यह कैसा न्याय”- विनोद कुमार शर्मा
नीति नियंता संविधान निर्माताओं के द्वारा बनाए संविधान में संशोधनों के अधिकार के उपयोग से बड़ी अपेक्षाएं होती हैं…
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शीर्षक: प्यारी मुस्कान – सुमन दूबे साऊंखोर बड़हलगंज गोरखपुर
अस्पताल के आईसीयू के बाहर बैठी साठ वर्षीय सुमित्रा जी की आँखें लगातार घड़ी की सुइयों पर टिकी थीं।…
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आज कितना सुन्दर संगम है आज तीन पर्व एकसाथ हैं। -मंजू शर्मा ‘मनस्विनी’
आज हरितालिका तीज है। सावन की भीगी हवा में मेहँदी की खुशबू लिए भादों की तीज आई है। हथेलियों…
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उसके बाद…डॉ इंदु भार्गव जयपुर
शाम का धुंधलका धीरे-धीरे गाँव की पगडंडियों पर उतर रहा था। सूरज जाने से पहले अपनी आख़िरी किरणें पुराने…
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आंखें -डॉ. दक्षा जोशी ‘निर्झरा’ अहमदाबाद, गुजरात।
मानव-देह में आँखें केवल देखने का माध्यम नहीं, बल्कि अंतर्मन और बाहरी संसार के बीच खुलने वाली वह खिड़की…
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उन्चास मरुत : प्रकृति की गति और जीवन का संगीत – कविता साव, पश्चिम बंगाल
भारतीय वैदिक परंपरा में प्रकृति के प्रत्येक तत्व को केवल भौतिक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि चेतना और…
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लघुकथा: कश्मकश- पालजीभाई राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर- गुजरात)
अमृतभाई और अरुणाबेन को एकलौता बेटा अशोक था।वो बचपन से जिद्दी स्वभाव का था। थोड़ा स्वछंदी भी बन गया…
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