शीर्षक: प्यारी मुस्कान – सुमन दूबे साऊंखोर बड़हलगंज गोरखपुर

अस्पताल के आईसीयू के बाहर बैठी साठ वर्षीय सुमित्रा जी की आँखें लगातार घड़ी की सुइयों पर टिकी थीं। उनके इकलौते बेटे राहुल की जटिल सर्जरी चल रही थी। तनाव और डर से उनका दिल बैठा जा रहा था। तभी अस्पताल के गलियारे में छह साल की एक छोटी सी बच्ची, जो शायद किसी अन्य मरीज से मिलने आई थी, दौड़ते हुए उनके पास आई।
बच्ची के हाथ में एक छोटी सी कागज़ की तितली थी। उसने रुककर सुमित्रा जी को देखा, और बिना किसी संकोच के अपना छोटा सा हाथ आगे बढ़ाकर एक प्यारी मुस्कान के साथ बोली, “दादी, यह तितली आपके आँसू पोंछ देगी, रोइए मत!”
सुमित्रा जी का कठोर और डरा हुआ चेहरा उस मासूम की बेदाग मुस्कान को देखकर पिघल गया। उन्होंने कांपते हाथों से बच्ची को गले लगा लिया और उनके होंठों पर भी एक हल्की सी मुस्कराहट तैर गई।
ठीक उसी समय डॉक्टर बाहर आए और मुस्कुराते हुए बोले, “बधाई हो सुमित्रा जी! राहुल की सर्जरी सफल रही है।”
सुमित्रा जी ने भगवान का शुक्रिया अदा किया और समझ गईं कि दुनिया के सबसे बड़े अंधेरे को भी एक छोटी सी प्यारी मुस्कान रोशनी में बदल सकती है।
सुमन दूबे साऊंखोर
बड़हलगंज गोरखपुर




