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आलेख लेखन: युवाओं में नैतिक पतन को कैसे रोका जाए- श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर- गुजरात)

आज के युवा धन देश की सबसे बड़ी शक्ति और भविष्य की आधारशिला माने जाते हैं। यदि युवाओं में नैतिक मूल्यों का अभाव होगा तो निश्चित ही इसका बुरा प्रभाव पूरे परिवार समाज और देश की प्रगति पर अवश्य पड़ेगा। आज के भौतिकतावादी युग में और आधुनिक रहन सहन सोशल मीडिया से आज के युवाओं की जीवन जीवन शैली पर असर दिखाई देता है। नैतिकता का पतन गंभीर बाबत बन गई है।आज का युवा स्वच्छंदी क्रोधी धैर्य रहित अमर्यादा के आचरण करने वाला बन गया है।आज की युवाओं परिवार से दूर होते जा रहे हैं। इनमें नैतिक मूल्यों की कमी दिखाई देती है।भविष्य के लिए यह खतरा रूप साबित होगी।घर पहली पाठशाला होती है बाल्यावस्था से ही उनको संस्कार देना होगा। युवाओं में बढती नशे की प्रवृत्ति असहिष्णुता ये सब रोकना होगा। सोशल मीडिया का विवेकपूर्ण उपयोग करें जो समझना होगा। आज की युवाओं को सामाजिक और पारिवारिक अपनी जिम्मेदारी समझानी होगी।घर में बुजुर्गों का सम्मान बड़े लोगों की आज्ञा पालन अतिथि सत्कार रिश्तों का सम्मान परिवार में कैसे रहना यह सब सीखना होगा। युवाओं में ही संस्कार की कमी होगी तो वो अपने परिवार बच्चों को क्या शिक्षा देगा। आज की युवाओं को साहित्य खेल योग जैसी सकारात्मक सामाजिक कार्यों में जोड़ना आवश्यक बन गया है। तभी युवाओं में नैतिक पतन रोका जाएगा।

श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’
(सुरेंद्रनगर- गुजरात)

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