पत्रों ने फिर जगाई संवेदनाओं की अलख।

सुनीता त्रिपाठी’अजय। इंडिया जागरण टुडे संवाद
जयपुर। स्वयं सिद्धा साहित्यिक संस्थान, जयपुर के तत्वावधान में रविवार को डॉ. राधाकृष्णन पुस्तकालय, जेएलएन मार्ग में दो महत्वपूर्ण पत्र-साहित्य कृतियों ‘स्मृति में रचे-बसे अद्भुत पत्र’ और ‘चयनित पत्र पुष्प’ पर परिचर्चा आयोजित की गई। कार्यक्रम में पत्रों के माध्यम से रिश्तों, स्मृतियों और मानवीय संवेदनाओं को सहेजने के प्रयास को रेखांकित किया गया।
डॉ. कृष्णा रावत द्वारा संकलित एवं संपादित ‘स्मृति में रचे-बसे अद्भुत पत्र’ तथा आ. साकार श्रीवास्तव ‘फ़लक’ एवं डॉ. कृष्णा रावत द्वारा संपादित ‘चयनित पत्र पुष्प’ पर समीक्षक डॉ. सुषमा शर्मा, कविता मुखर, इन्द्र कुमार भंसाली एवं ज्योत्सना सक्सेना ने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि पत्र केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि प्रेम, मित्रता, वात्सल्य, सम्मान और रिश्तों की आत्मीयता को संजोने वाला साहित्यिक दस्तावेज हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रशासनिक अधिकारी डॉ. सूरज सिंह नेगी ने की, जबकि मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं आईएएस टीकम चन्द बोहरा ‘अनजाना’ रहे। मंच संचालन साहित्यकार एवं प्रधानाचार्य डॉ. आशा शर्मा ने किया।
डॉ. कृष्णा रावत ने बताया कि ‘पाती अपनों की’ मुहिम के तहत प्रकाशित 11 पुस्तकों में संकलित 1103 पत्रों में से 363 चुनिंदा पत्रों को इन दोनों पुस्तकों में स्थान दिया गया है। ‘लिख दी पाती बाबुल को’, ‘स्मृतियों के झरोखे से’, ‘पाती डाकिये को’, ‘बच्चों के पत्र’, ‘पाती शिक्षक को’, ‘एक पाती मीत को’ और ‘पत्र पिता के’ जैसे संग्रहों के माध्यम से परिवार, मित्रता, गुरु-शिष्य संबंध तथा सामाजिक सरोकारों की भावनात्मक तस्वीर सामने आती है।
समीक्षकों ने विशेष रूप से ‘एक पाती मीत को’ के पत्रों में व्यक्त पवित्र मित्रता और निःस्वार्थ आत्मीयता को रेखांकित किया। मुख्य अतिथि टीकम चन्द बोहरा ‘अनजाना’ ने बदलते समय में रिश्तों की बढ़ती संवेदनहीनता पर चिंता जताई। अ
ध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. सूरज सिंह नेगी ने कहा कि पत्रों के माध्यम से अतीत की स्मृतियों और रिश्तों की ऊष्मा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना इस मुहिम का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।इस अवसर पर संरक्षक एवं पूर्व प्रो. कुसुम शर्मा, संस्थापक अध्यक्ष ज्ञानवती सक्सेना ‘ज्ञान’, महासचिव डॉ. रेखा गुप्ता सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। पुष्पा माथुर एवं सलोनी क्षितिज ने साकार श्रीवास्तव एवं डॉ. कृष्णा रावत के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. सूरज सिंह नेगी एवं डॉ. मीना सिरोला द्वारा शुरू की गई ‘पाती अपनों की’ मुहिम आज वटवृक्ष का रूप ले चुकी है। पत्रों के माध्यम से संवेदनाओं और रिश्तों को सहेजने का यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण साहित्यिक धरोहर साबित होगा। सामूहिक राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।




