साहित्य संगम मंच की अगस्त माह की मासिक काव्य गोष्ठी में बिखरे राष्ट्रप्रेम, सावन और स्नेह के रंग
स्वतंत्रता दिवस विशेष | सुनीला नारंग ‘बहुरंगी’ जन्मदिवस विशेष | तीज उत्सव विशेष
दिनांक: 15 अगस्त 2026, शनिवार
समय: शाम 4:00 बजे
माध्यम: Google Meet
जयपुर। साहित्य संगम मंच द्वारा 15 अगस्त 2026 को अगस्त माह की मासिक काव्य गोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया गया। स्वतंत्रता दिवस, सावन-तीज उत्सव तथा मंच की अध्यक्ष सुनीला नारंग ‘बहुरंगी’ जी के जन्मदिवस को समर्पित यह विशेष काव्य-संध्या राष्ट्रप्रेम, संस्कृति, प्रकृति और आत्मीयता के विविध रंगों से सराबोर रही।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुनीला नारंग ‘बहुरंगी’, संचालक शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ तथा संयोजक अलका गर्ग ‘अक्श’ रहीं।
राष्ट्रप्रेम से गूंजा काव्य मंच
स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, देशभक्ति, स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग तथा तिरंगे की आन-बान-शान को शब्दों में अभिव्यक्त किया। रचनाओं में मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भारत के गौरव की भावना प्रभावशाली रूप से उभरकर सामने आई।
ऑनलाइन काव्य-संध्या में प्रस्तुत रचनाओं ने ऐसा भावपूर्ण वातावरण निर्मित किया, मानो शब्दों के माध्यम से तिरंगा लहरा रहा हो और प्रत्येक पंक्ति भारत माता के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित कर रही हो।
सावन-तीज की उमंग से महकी गोष्ठी
कार्यक्रम में प्रस्तुत सावन और तीज की रचनाओं ने साहित्यिक वातावरण को उत्सवमय बना दिया। हरियाली, रिमझिम फुहारें, झूले, मेहंदी, चूड़ियों की खनक, सखियों का उल्लास और लोक-संस्कृति के रंग रचनाकारों की प्रस्तुतियों में जीवंत हो उठे।
प्रकृति और लोकजीवन के इन मनोहारी चित्रों ने गोष्ठी में कोमलता, उल्लास और अपनत्व का रंग घोल दिया।
सुनीला नारंग ‘बहुरंगी’ के जन्मदिवस पर बरसा स्नेह

गोष्ठी का सबसे आत्मीय अवसर रहा मंच की अध्यक्ष सुनीला नारंग ‘बहुरंगी’ जी का जन्मदिवस। साहित्य संगम परिवार के रचनाकारों ने काव्यात्मक शुभकामनाओं, बधाई संदेशों और स्नेहिल भावों से उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं।
रचनाकारों ने उनके साहित्य-प्रेम, सृजनशील व्यक्तित्व और मंच के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी, दीर्घ एवं रचनात्मक जीवन की मंगलकामना की। जन्मदिवस विशेष की रचनाओं ने आयोजन को और भी आत्मीय बना दिया।
रचनाकारों की गरिमामयी सहभागिता
इस विशेष काव्य गोष्ठी में सूचीबद्ध रचनाकारों में से अंजू मल्लिक जी को छोड़कर सभी रचनाकारों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और अपनी सुंदर रचनाओं से काव्य-संध्या को समृद्ध किया।
कार्यक्रम में उपस्थित रचनाकारों में सीमा पुरबा ‘सिम्मी’, संजीव कुमार ‘पथिक’, गोपाल सिन्हा, अलका जैन ‘आनंदी’, हेमचंद्र सकलनी, मीरा सजवान ‘मानवी’, शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’, अलका गर्ग ‘अक्श’, सुनीला नारंग ‘बहुरंगी’, राजेश कुमार ‘राज’, सुनीता तिवारी, स्वेता गुप्ता, सौम्या दुआ तथा आशा दिनकर ‘आस’ शामिल रहीं।
अंजू मल्लिक जी इस आयोजन में उपस्थित नहीं हो सकीं।
कुशल संचालन और आत्मीय संयोजन
संचालक शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ ने कार्यक्रम का कुशल एवं गरिमामय संचालन करते हुए सभी रचनाकारों को ससम्मान आमंत्रित किया। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस, तीज और जन्मदिवस विशेष के भावों को एक सूत्र में पिरोते हुए काव्य-संध्या को सुंदर गति प्रदान की।
संयोजक अलका गर्ग ‘अक्श’ के सुव्यवस्थित संयोजन ने कार्यक्रम को आत्मीय और गरिमामय स्वरूप प्रदान किया। वहीं मुख्य अतिथि एवं मंच अध्यक्ष सुनीला नारंग ‘बहुरंगी’ जी की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
साहित्य, संस्कृति और संवेदना का सुंदर संगम
पूरी काव्य गोष्ठी में कहीं राष्ट्रप्रेम की गूंज सुनाई दी, कहीं सावन की फुहारों का संगीत, कहीं तीज की लोक-संस्कृति के रंग दिखाई दिए तो कहीं जन्मदिवस की शुभकामनाओं में स्नेह की मिठास घुली नजर आई।
इस प्रकार यह आयोजन केवल एक काव्य गोष्ठी न रहकर राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, प्रकृति, साहित्य और आत्मीय संबंधों का सुंदर उत्सव बन गया।
साहित्य संगम मंच के रचनाकारों ने अपनी सृजनात्मक सहभागिता से यह सिद्ध किया कि साहित्य हृदयों को जोड़ने और उत्सवों को भावों की गरिमा प्रदान करने का सशक्त माध्यम है।
आभार
साहित्य संगम मंच की ओर से सभी उपस्थित रचनाकारों का हृदय से आभार व्यक्त किया गया, जिन्होंने अपनी सुंदर रचनाओं और स्नेहिल सहभागिता से इस विशेष काव्य-संध्या को यादगार बनाया।
विशेष आभार मुख्य अतिथि एवं मंच अध्यक्ष सुनीला नारंग ‘बहुरंगी’ जी, संचालक शिखा खुराना ‘कुमुदिनी’ तथा संयोजक अलका गर्ग ‘अक्श’ का, जिनके सहयोग एवं समर्पण से यह आयोजन सफल और सार्थक बना।
अंततः—
तिरंगे की शान में शब्द खिले,
सावन की फुहारों में भाव मिले।
तीज की उमंग ने रंग सजाए,
सुनीला जी के जन्मदिन पर स्नेहिल दीप जलाए।
साहित्य के इस सुंदर संगम में,
हर हृदय ने अपनेपन के गीत गाए।
साहित्य संगम मंच
साहित्य, सृजन और संवेदनाओं का सुंदर संगम।
जय हिंद!
जय साहित्य!
जय साहित्य संगम मंच!




