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सफ़र सिर्फ एक ही का है – महेन्द्र कुमार सिन्हा जय महासमुंद छत्तीसगढ़

जन्म से लेकर मृत्यु तक का सफर सिर्फ एक ही का है। आत्मा का परमात्मा से मिलन का सफर सिर्फ एक ही का है।
जीवन के इस पड़ाव में बहुत सारे रिश्ते नाते साथी संबंधी मिलते बिछुड़ते है। कभी अमीरी कभी गरीबी कभी खुशी कभी ग़म इन सबके बीच जीवन का सफर चलता रहता है।पर आपके आत्मा से परमात्मा से मिलन का सफर एकाकी है । सिर्फ सिर्फ आपका ही सफर है।इस सफर को आपको अकेले ही जारी रखना है। यही जीव के जीवन की सच्चाई है , वास्तविकता है। चाहे तुम इसे अभी मानों चाहे बाद में।
जीव का अर्थात् आत्मा का परमात्मा से मिलन ही जीव जीवन की वास्तविकता है।
महेन्द्र कुमार सिन्हा जय
महासमुंद छत्तीसगढ़




