शीर्षक — वो यादगार पल वो खतों का सिलसिला –शिवा सिंहल आबुरोड

पहले कहां मोबाइल का जमाना था मन की बातें खतों द्वारा ही लिखीं जाती थी। कभी-कभी जीवन की कुछ हसीन यादों में समय बीतता है, पर यादें गहरी हो सीने से लिपट जातीं हैं।
मेरा पहला यादगार पत्र ही कुछ खास था आज भी मैंने उसे संभाल कर रखा है। दिल में उसकी चाबी छुपा के रखी है । बात 11 दिसंबर 1983 की है, जब मेरी सगाई हुई थी । तब इनका पहला खत मुझे 17 दिसंबर को आया। घर पर भैया ने आवाज लगाई शिवा तेरी चिट्ठी आई हैं। इतना सुनते ही छोटे भाई ने लपक कर छीन ली। पहला खत ते खर्ची तो बनती है दीदी, बड़ी मुश्किल से मैं ₹50 में वह खत छुड़वाया।
पत्र हाथ में था पर मन कांप रहा था। जाने क्या लिखा होगा ,क्या करूं ,कुछ देर सोचने के बाद धीरे से मैंने घुंघट के पट सा खत को खोला। खत में स्प्रे की महक से पुरा घर महक गया पूरे पेज में दिल बने हुए थे उसमें मेरा नाम लिखा हुआ था पत्र पढ़ कर मन बहुत खुश हुआ।
आगे क्या लिखा था बताती हूं ,थोड़ा सब मित्रों को भी हसाती हूं ।
*मेरी दिलोजान, मेरी जानेमन,काश जाते-जाते तेरा दीदार हो जाता।*
*मन बाग-बाग हो जाता एक कसक मन में लिए आया हूं। *तुने ये अच्छा नहीं किया शिवा। मेरे खत का जवाब जल्दी देना में इंतजार करूंगा।*
यह पढ़ करके में अपनी हंसी रोक नहीं पाई में बहुत हंसी मैं मन ही मन बड़बड़ाती बोली *मैं तो बालकनी में ही बैठी थी राज तुझे नजर नहीं आई तो मैं क्या करूं।*
यही तड़प ही तो सच्चा प्यार है तभी तो तुम्हें खत लिखने को मजबूर किया और मुझे तुम्हारा खत मिला।
मैंने भी जवाब में बहुत अच्छा खत लिखा। राज ने उस खत को 100 बार पढ़ा फिर भी जी ना भरा। घरवाले सब बोले ऐसा क्या लिखा है जरा हम भी तो जाने।तब किताब में पाठ की तरह जोर-जोर से खत को पढ़ सबको सुनाने लगे बीच-बीच में मुस्कुराने लगे। सभी हंसने लगे बच्चे भी खत छीन कर भागने लगे राज को सताने लगे।
*निष्कर्ष:-*में सच बताऊं यारो यह खत का सिलसिला बड़ा जबरदस्त था। सप्ताह में एक बार की जगह हम ने दो बार लिखना शुरू किया। फिर राज कहे शिव ऐसे तो समय काटना बहुत मुश्किल है। क्यों ना हम हर रोज लिखे तो हमें हर 2 दिन में एक खत मिले।
फिर हमने रोज लिखनी शुरू किया सप्ताह में हमें दोस्त 3 से 4 खत मिलने लगे ।
दोस्तों आज भी मैं उन खतों की फाइल बना के रखी है। यही मेरी जिंदगी के सबसे पहला हसीन यादगार पल है। जिसे जितना शब्दों में बयान करो उतना कम है। क्योंकि मेरे राज के प्यार में हम है।
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शिवा सिंहल आबुरोड




