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वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश सिंह का समरस फाउंडेशन ने किया सम्मान

 

वेदों और पुराणों के भाष्य का कर रहे हैं ऐतिहासिक काम

मुंबई। महानगर की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था समरस फाउंडेशन द्वारा देश के वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश सिंह का बोरीवली पूर्व स्थित कार्यालय में सम्मान किया गया। संस्था के चेयरमैन डॉ किशोर सिंह ने शॉल और पुष्प गुच्छ से उनका सम्मान किया। इस अवसर पर संस्था के डालमिया कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर भानु प्रकाश सिंह, उपाध्यक्ष मुकुंद शर्मा, उपाध्यक्ष मानिकचंद यादव, पूर्व प्रधानाचार्य सुरेंद्र पांडे, विधि सलाहकार एडवोकेट प्रशांत परदेसी,सलाहकार रामकृपाल शर्मा, पूरव गांधी समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।

ओम प्रकाश सिंह धर्मयुग , जनसत्ता , दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण और नई दुनिया जैसे अखबारों में वरिष्ठ सम्पादकीय पदों पर रहे हैं। खोजी और विश्लेषणात्मक पत्रकारिता उनकी विशेष पहचान रही है। पिछले कई वर्षों से इतिहास, पुरातत्व, भाषा विज्ञान व मानव प्रवास और प्रव्रजन के क्षेत्र में आयी नई जानकारियों के आधार पर वेदों और पुराणों के भाष्य का काम कर रहे हैं। इस बात की संभावना व्यक्त की जा रही है कि इन भाष्य के सामने आने के बाद पूरी दुनिया के पुरातन इतिहास और धर्म और अध्यात्म की कई अवधारणाओं पर बड़ा असर पड़ेगा। समझा जा रहा है कि सनातन धर्म के जिन अंशों को अब्राह्मिक धर्मों ने मिटा दिया, इन भाष्य से उन अंशों की पुनर्जागृति हो सकती है। ऐसा हुआ तो विश्व मानवता को भारत का यह अप्रतिम उपहार होगा। उन्होंने इन भाष्य को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये सामने रखना शुरू किया है। अभी २८ जून को मीरा रोड के श्री एल आर तिवारी इंजीनियरिंग कॉलेज के सभागार में आयोजित एक अभियान सभा में उन्होंने हिन्दू तारा और स्वरोचिस मन्वन्तर के बारे में जानकारियाँ दीं। इस सभा की अध्यक्षता प्रसिद्ध शिक्षाविद श्री लल्लन तिवारी ने की। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में अंडमान निकोबार द्वीप समूह के राज्यपाल महामहिम दिनेश शर्मा थे। सनातन धर्म की वैश्विक ज्योति मीरा भायंदर की महापौर डिम्पल मेहता ने प्रज्वलित की। इन्हीं सांस्कृतिक अभियान सभाओं के अंतर्गत २६ अक्टूबर से १ नवम्बर, २०२६ तक जफराबाद और जौनपुर में सत्य हरिश्चंद्र संस्कृति महोत्सव व समाज संवाद आयोजित किया जा रहा है। इस महोत्सव में देश के कई जाने-माने सामाजिक व्यक्तित्व व संस्कृतिकर्मी शामिल हो रहे हैं। इस महोत्सव में सनातन धर्म की वैश्विक संकल्पना पर बात होगी , और जफराबाद और जौनपुर के तुगलक और शर्की सल्तनत के शासन के पहले के इतिहास को भी सामने लाया जाएगा। जफराबाद और जौनपुर इक्ष्वाकु वंश के अंश , काशी विश्वेश्वर के रक्षक गण और ब्रह्म विद्या के बड़े केंद्र थे। इसलिए संवाद खंड का नाम इक्ष्वाकु वंश और सनातन धर्म व संस्कृति खंड का नाम ब्रह्मोत्सव रखा गया है। कार्यक्रम नाग वंश और नाग माता मनसा को लेकर भी विस्तृत चर्चा की जा रही है। जौनपुर नाग माता मनसा की उपासना और सिद्धि का भी बड़ा केंद्र था।

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