मेरे हीरो मेरे पापा — डॉ संजीदा खानम’शाहीन

क्या कहूँ पापा के लिये अल्फाज नही है नि:शब्द हु पापा के लिये जज्बात नही है। पूरा का पूरा सागर है समुद्र जिसका को कोई छौर (किनारा) नही है।
जिनके पापा नही है ,इस दुनिया से रुखसत गये हो (चल बसे)हो।उनसे पूछो? क्या होते पापा जितना कहू कम है पापा के लिये,शब्दो मे तस्वीर नही बांध सकते पापा की, शब्दों में बयां करना आसान नही पापा को , पापा वो है जो जीवन देते ,
पापा वो है जो जीवन देकर पालन-पोषण करते, पापा वो है जो पढ़ाते- लिखाते ,पापा वो है जो काबिल बनाते जिन्दगी मे साथ निभाते शादी ब्याह कराते बचपन मे खिलाते और शादी के बाद बच्चो को निभाते बच्चो को खेलाते जिन्दगी देते और साथ देते जीवन भर सर्दी’गर्मी’बरसात कमाते बिमार होने पर ईलाज कराते दुख सुख मे हमेशा अपना रोल निभाते। कोई लड़े तो खुद बच्चो के लिये लड़ जाते मेरे पापा मेरे हीरो कहलाते खुद दुखी हो जाते पर बच्चो पर आंच ना आने देतेअपना चैन सकूं सब कुर्बान कर देते नीन्द खाना पीना सब त्याग कर देते बच्चो की परिवार की ज़रूरत की हर चीज़ लाते।
तक़लीफो मे ढ़ाल बन जाते पहाड़ की तरह अड़ जाते दुखो से लड़ जाते कोई भी चीज़ मांगो हंसी खुशी लाते महंगा सस्ता ना देखते ना तोल मोल करते बस बच्चो की खुशियां देखते
एसे मेरे हिरो मेरे पापा कहलाते,
कभी काम की छुट्टी ना करते,
पार्ट टाईम भरते अपनी हर चीज़
बच्चो पर न्यौछावर कर देते,
रूठ जाओ तो मनाते रोते हो तो
हंसाते,समाज मे मान मर्यादा से जीना सिखाते । गलती करो तो समझाते कभी ना मारते प्यार से समझाते और डांट भी दे तो तुरंत मनाते गप्पे लड़ाते।
पिकनिक ले जाते घूमाते फिराते
जग की सैर कराते,
मेरे हीरो मेरे पापा कहलाते,
पापा घर की छत आसमां है,
पापा पेड़ की छाँव है,
पापा घाव का मरहम है,
पापा दुख का हरण है,
पापा चेहरे की रोनक है,
पापा दोहरी खुशी है,
पापा है तो गम भी दूर है,
पापा है तो सभी नेमत है,
पापा बिना जिन्दगी वीरान है,
पापा घर की जान है,
पापा घर की शान हैं,
पापा घर की आन है,
पापा मेरी जान है
पापा है तो खुशी है,
पापा दिलो की धड़कन,
पापा मम्मी की जान है,
पापा बिन तड़पन है,
पापा से दुनिया है,
पापा बिन क्यामेरे हीरो मेरे पापा
क्या कहूँ पापा के लिये अल्फाज नही है नि:शब्द हु पापा के लिये जज्बात नही है। पूरा का पूरा सागर है समुद्र जिसका को कोई छौर (किनारा) नही है।
जिनके पापा नही है ,इस दुनिया से रुखसत गये हो (चल बसे)हो।उनसे पूछो? क्या होते पापा जितना कहू कम है पापा के लिये,शब्दो मे तस्वीर नही बांध सकते पापा की, शब्दों में बयां करना आसान नही पापा को , पापा वो है जो जीवन देते ,
पापा वो है जो जीवन देकर पालन-पोषण करते, पापा वो है जो पढ़ाते- लिखाते ,पापा वो है जो काबिल बनाते जिन्दगी मे साथ निभाते शादी ब्याह कराते बचपन मे खिलाते और शादी के बाद बच्चो को निभाते बच्चो को खेलाते जिन्दगी देते और साथ देते जीवन भर सर्दी’गर्मी’बरसात कमाते बिमार होने पर ईलाज कराते दुख सुख मे हमेशा अपना रोल निभाते। कोई लड़े तो खुद बच्चो के लिये लड़ जाते मेरे पापा मेरे हीरो कहलाते खुद दुखी हो जाते पर बच्चो पर आंच ना आने देतेअपना चैन सकूं सब कुर्बान कर देते नीन्द खाना पीना सब त्याग कर देते बच्चो की परिवार की ज़रूरत की हर चीज़ लाते।
तक़लीफो मे ढ़ाल बन जाते पहाड़ की तरह अड़ जाते दुखो से लड़ जाते कोई भी चीज़ मांगो हंसी खुशी लाते महंगा सस्ता ना देखते ना तोल मोल करते बस बच्चो की खुशियां देखते
एसे मेरे हिरो मेरे पापा कहलाते,
कभी काम की छुट्टी ना करते,
पार्ट टाईम भरते अपनी हर चीज़
बच्चो पर न्यौछावर कर देते,
रूठ जाओ तो मनाते रोते हो तो
हंसाते,समाज मे मान मर्यादा से जीना सिखाते । गलती करो तो समझाते कभी ना मारते प्यार से समझाते और डांट भी दे तो तुरंत मनाते गप्पे लड़ाते।
पिकनिक ले जाते घूमाते फिराते
जग की सैर कराते,
मेरे हीरो मेरे पापा कहलाते,
पापा घर की छत आसमां है,
पापा पेड़ की छाँव है,
पापा घाव का मरहम है,
पापा दुख का हरण है,
पापा चेहरे की रोनक है,
पापा दोहरी खुशी है,
पापा है तो गम भी दूर है,
पापा है तो सभी नेमत है,
पापा बिना जिन्दगी वीरान है,
पापा घर की जान है,
पापा घर की शान हैं,
पापा घर की आन है,
पापा मेरी जान है
पापा है तो खुशी है,
पापा दिलो की धड़कन,
पापा मम्मी की जान है,
पापा बिन तड़पन है,
पापा से दुनिया है,
पापा बिन क्या है कुछ नही?
पापा है तो दुनिया रंगीन है,
पापा बिन दुनिया गमगीन है,
शब्दो मे समेटना मुश्किल है पापा को,
बस इतना कहूँगी कम कहा पापा को ,
जितनी भी तारिफ करूं कम है,
बस इतना कह सकती हूँ ,
मेरे हीरो मेरे पापा कहलाते,
मेरे हीरो मेरे पापा कहलाते।
मौलिक, स्वरचित
डॉ संजीदा खानम’शाहीन है कुछ नही?
पापा है तो दुनिया रंगीन है,
पापा बिन दुनिया गमगीन है,
शब्दो मे समेटना मुश्किल है पापा को,
बस इतना कहूँगी कम कहा पापा को ,
जितनी भी तारिफ करूं कम है,
बस इतना कह सकती हूँ ,
मेरे हीरो मेरे पापा कहलाते,
मेरे हीरो मेरे पापा कहलाते।
मौलिक, स्वरचित
डॉ संजीदा खानम’शाहीन




