लेख: प्रकृति का मौन संदेश लेखक: राजेश कुमार ‘राज’

प्रकृति मानव जीवन की सबसे बड़ी शिक्षक है। वह अपने मौन संदेशों के माध्यम से हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। यदि हम ध्यानपूर्वक देखें तो प्रकृति का प्रत्येक तत्व किसी न किसी मूल्यवान संदेश का वाहक है।
उगता हुआ सूर्य हमें निरंतर कर्म करने और अंधकार को दूर करने की सीख देता है। बहती हुई नदी जीवन में गतिशीलता बनाए रखना सिखाती है। यदि नदी रुक जाए तो उसका अस्तित्व संकट में पड़ जाता है। ठहराव प्रगति में बाधक होता है। विशाल पर्वत धैर्य, दृढ़ता और आत्मविश्वास का संदेश देते हैं। वे आँधियों, वर्षा और ताप को सहकर भी अचल खड़े रहते हैं।
हरे-भरे पेड़ निःस्वार्थ सेवा का अद्भुत उदाहरण पेश करते हैं। वे स्वयं धूप सहकर दूसरों को छाया और फल देते हैं एवं पर्यावरण को शुद्ध बनाते हैं। फूल हमें सिखाते हैं कि जीवन चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो, परन्तु सौन्दर्य और सुगंध से परिपूर्ण होना चाहिए। पक्षियों का मधुर कलरव आज़ादी और हर्ष का द्योतक है।
आज का मानव भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में प्रकृति से दूर होता जा रहा है। फलस्वरूप पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक असंतुलन जैसी समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। प्रकृति का मौन संदेश स्पष्ट है कि मनुष्य और प्रकृति का सम्बंध सहयोग और संतुलन पर आधारित होना चाहिए। यदि हम प्रकृति का सम्मान करेंगे तो वह हमें नवजीवन, स्वास्थ्य और ख़ुशहाली प्रदान करेगी।
अतः आवश्यक है कि हम प्रकृति के इन मौन संदेशों को समझें, पर्यावरण की रक्षा करें और उसके साथ तारतम्य स्थापित कर एक संतुलित एवं सुखद भविष्य सुनिश्चित करें।
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