संस्मरण लेख: मुसीबतों के काले बादल – श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर गुजरात)

मुसीबतों के काले बादल जीवन की वे कठिन परिस्थितियां हैं जो अचानक उमड़ आती हैं। हमारे जीवन में हलचल मचा देती है। लेकिन इनसे पार पाने पर ही हमें असल ताकत का एहसास होता है।और आखिर कार आशा की किरण चमक उठती है।इस विकट परिस्थिति से हम बाहर निकाल सकते हैं।अचानक घिरी अनहोनी यह बात उसे समय की है जब मैं सातवीं कक्षा में पढ़ता था। मेरे पिताजी बहुत पढ़े लिखे नहीं थे। इनमें व्यापारी बुद्धि थी। मैं सबसे बड़ा था। कोई भी काम करते तो मुझे पूछ लेते थे। एक बार काला कपास जीरु एरंडा अनाज कठोल का व्यापार करना तय किया। हमारे घर के पास बड़ा वरंडा था।रिश्तेदार गांव के किसानों के पास से माल लेना शुरू किया। सब माल ये वरंडा में एकठा किया। मेरे पिताजी वहां सोते रहते थे।एक दिन उसको बाहर जाना पड़ा।और यहां वरंडा में अचानक आग लगी। जीरु एरंडा तो बचा लेकिन काल कपास तो खाक हो गया। मेरे पिताजी ने जाना तो पागल जैसा बन गया। वो सोचने लगे रिश्तेदार गांव के किसानों को क्या मुंह बताऊं। एक बार आत्महत्या कर ने के लिए भी सोचा। मैंने पिताजी को कहा; ‘जीवन है मुसीबते तो आती रहती है।समय कितना भी कठिन क्यों न हो परिस्थितियां कितनी भी कठिन हो अगर चुनौतियों का सामना करते हैं तो अवश्य सफलता प्राप्त करते हैं। मनचाहा वक्त नही रुकता तो अनचाहा कैसे रुकेगा गुजर ही जायेगा। इस मुसीबत भरी घड़ी में आत्महत्या कर लेना उपाय नहीं है। इस विकट परिस्थिति में धीरज रखना बहुत जरूरी है।धैर्य से काम लो। रिश्तेदार किसानों को समझाओं मैं आपकी पाई पाई चुका दूंगा। किसान आपकी बात मान जाएंगे।भरोसा बनाये रखना लोग तस्वीरों में नही तकलीफों में खड़े मिलेंगे।मेरी बात से मेरे पिताजी ने साहस से काम लिया। किसान लोग समझ भी गए। वो मुसीबत के काले बादल मेरे पिताजी पर जाएं। आज भी मुझे संस्मरण होता है। मैं सोच में पड़ जाता हूं। ये कैसी परिस्थिति थी। बाद में दुशरे साल अच्छा व्यापार हुआ। रिश्तेदार किसान सब की नाणा की भरपाई हो गई। फिर से जिंदगी हरी भरी हो गई। मेरे पिताजी बहुत खुश थे।
‘प्रेम’ जिस के पास है सद् व्यवहार वह वास्तव में है सब से अमीर,
अच्छी सोच मधुर व्यवहार सम्मान पाते जैसे परमवीर।
श्री पालजीभाई वी राठोड़ ‘प्रेम’ (सुरेंद्रनगर गुजरात)




