हिन्दी दिवस विशेष – मीनाक्षी सुकुमारन नोएडा
हर वर्ष बड़े ही जोश, हर्ष , अभिमान से मनाया
जाता हिन्दी दिवस 14 सितंबर को
हर जगह प्रचार प्रसार, स्लोगन, कविता,
निबंध, पोस्टर प्रतियोगिताएं और
फेसबुक भी इससे कहाँ है अछूता है
हर मंच पर हिन्दी की गूंज
वहीं व्हाट्सएप पर गूगल मीट हर समूह की
हर तरफ बस हिन्दी और हिन्दी दिवस का ही शोर।।
पर क्या ये विडंबना नहीं
भारतीय संस्कृति की विरासत,भारत की राजभाषा
हमारी मातृभाषा ,रोज़ मरा की बोली
हमारी लिखने की, अभिव्यक्ति की
सबसे सरल, सुन्दर, गरिमामयी
भाषा हिन्दी जिसमें हम सहजता से अपनी
भावनाओं और एहसासों को शब्दों में ढाल सकते हैं
उसे उसका अस्तित्व दिलाने जागरूकता हेतु
अथवा प्रोमोट यानी प्रचार करने हेतु हिन्दी दिवस का
सहारा लेना पढ़ता है जो एक दिवसीय, एक पखवाड़ा चलता है।।
पर सवाल वही रहता है हिन्दी को अपनाने,
उसके प्रयोग का, उसे बोलने, लिखने, समझने,
उसे दिल से, मन से अपनी भाषा मानने का जो
सिर्फ हमारी संस्कृति, धरोहर ही नहीं
संतों की वाणी, महाग्रंथ, कविता, उपन्यास, गीत,
ग़ज़ल,कहानी, दोहों की महावाणी है
जैसे ईश्वर की आराधना,प्रार्थना, आरती।।
इसकी मधुरता, मिठास दिलों को दिलों से जोड़ती है
सरल अभिव्यक्ति से तो इसकी गरिमा, पहचान को धूमिल
न होने दें इसे सिर्फ हिन्दी दिवस नहीं
जीवन में रोज़ अपनाएं, प्रयोग करें ,
इसका सम्मान करें जैसे माँ का करते हैं
वैसे ही अपनी मातृभाषा का भी
यही हमारी सच्ची साधना, लग्न होगी अपनी भाषा के प्रति
जो दिल से हो न की सिर्फ दिखावे या प्रसार हेतु
हिन्दी से हमारी शान है, हमारी पहचान है ये हमेशा हर किसी को याद रहे।।
..मीनाक्षी सुकुमारन
नोएडा




