गुरू की महिमा- नीलम सोनी फॉर्म ब्यावर राजस्थान

गुरू के बारे में जितना वर्णन किया जाए उतना कम है , पूरी धरती को कागज बना दूं। पूरे समंदर को स्याही बना दूं।पूरे पेड़ो को कलम बना दूं तो भी कम पड़ जाए शब्द गुरु की महिमा इतनी है।
गुरू की महिमा के लिए शब्द प्रयाप्य नहीं ।
गुरू को ईश्वर का दर्जा दिया गया है।तभी तो कहा गया —
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुरर्देवो महेश्वरः ।
गुरुःसाक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्रीगुरुवे नमः ।
जन्म-जन्म का साथ है गुरु एवं शिष्य का, भारतीय संस्कृति में प्राचीन परंपरा से यह ज्ञान की अविरल धारा समान रूप से शिष्यों के बीच पूज्य गुरुदेव श्री जी के द्वारा प्रवाह की जाती है इसमें जो भी डुबकी लगा लेता है वह अपने जीवन को सफल बना लेता है ।
“”जीवन अंधकार को मिटाता गुरू ,
सीधी सच्ची राह दिखाता गुरू “”
वेद पुराणों में भी गुरू की महिमा का बखान किया गया ।
कहते हैं “”गुरू बिना गत नहीं “”
अर्थात हमारा जीवन सुधारने वाला , सच की राह चलाने वाला, ईश्वर से मेल कराने वाला , परमार्थ का मार्ग दिखलाने वाला एक गुरु ही होता है ।
गुरू सदैव पूजनीय एवं आदरणीय है ,गुरू के लिए कोई एक दिन नहीं , सदैव हमें गुरू के चरणों में नतमस्तक रहना चाहिए
एक इन्सान अपने आखिरी समय तक कुछ ना कुछ सीखता ही रहता है , अर्थात वो शिष्य रहता है ।और शिष्य गुरू से ही सीखता है।सबसे पहले माँ गुरू होती है
इसलिए माँ को प्रणाम। जिन्होंने बोलना,चलना, अच्छे,बुरे का सुख,दुख। धूप छांव।सबका ज्ञान दिया।
उसके बाद हमें शिक्षक शिक्षा देकर जीवन में उन्नति की राह दिखाते हैं ,सतगुरु ईश्वर से मिलने की राह दिखाते हैं , सत्मार्ग पर चलने को प्रेरित करते हैं ,
इन गुरू जनों को भी वन्दन…
लेकिन जो दोस्त हमें सही राह दिखाए , कुछ हमें सिखाए ,हमें भला या बुरा बताएं ( समझाए ) वो भी गुरू की अर्थात शिक्षक की संज्ञा में ही आता है ।जल जाता है,वो दीपक की तरह कई जीवन रोशन कर जाता है।कुछ इस तरह गुरु अपना फर्ज निभाता है।ऐसे गुरु पर जां निसार , अन्त समय तक कोई ना कोई हमें गुरू बन कर कुछ ना कुछ सबक सिखाता है ,
कोई प्यार से और कोई वार से ( ठोकर मार कर ) सिखाता है। गुरु का योगदान हमारे जीवन में अनमोल होता है। हजारों फूल चाहिए, एक माला बनाने के लिए। हजारों दीपक चाहिए एक आरती सजाने के लिए। हजारों रंग चाहिए एक रंगोली बनाने के लिए। पर एक अकेला शिक्षक ही काफी है। जीवन को संवारने के लिए। एक धूल के कण मिट्ठी को जिसने सोना बनाया। जिंदगी को जिसने जीना सिखाया वो एक शिक्षक ही होता है। लेकिन आज पूरी जिंदगी जीने के बाद में केवल इतना समझा सबसे बड़ा आज जो गुरू है ,वो वक्त है।जो वक्त सिखाता है।वो कोई और नहीं सिखाता है।अगर आपका अच्छा वक्त है तो सब आपके अपने हैं। और वक्त से सही नहीं तो हर रिश्ता आपका नहीं है। वक्त और एक शिक्षक मे बस इतना सा फर्क है।शिक्षक सिखा के इम्तिहान लेता है।और वक्त इम्तिहान लेके सिखाता है। जब सब रास्ते बंद हो जाए।तब नया रास्ते एक उम्मीद की किरण केवल एक शिक्षक ही दिखाते है।केवल किताबी ज्ञान ही नहीं।जिंदगी जीना भी एक शिक्षक ही सिखाते है।एक नए युग का निर्वाण करते है शिक्षक । संघर्षों से लड़कर जीतना हमे सिखाते है शिक्षक।गुमनामी के अंधेरे में थी। पहचान बना दी। दुनिया के गम से मुझे अनजान बना दिया। गुरु की ऐसी कृपा हुई मुझे एक अच्छा इंसान बना दिया। आपको कोटि कोटि दिल से प्रणाम।
नीलम सोनी फॉर्म ब्यावर राजस्थान




