राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान एवं अनुकृति प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में गुलाबी नगरी में एक भव्य साहित्यिक संध्या का आयोजन।

सुनितात्रिपाठी’अजय । इंडिया जागरण टुडे
जयपुर। राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान एवं अनुकृति प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में गुलाबी नगरी में एक भव्य साहित्यिक संध्या का आयोजन किया गया। यह गरिमामय समारोह ‘अनुकृति’ पत्रिका की अनवरत 26 वर्षों की निष्ठापूर्ण साहित्यिक यात्रा, इसके 102वें विशेषांक के भव्य लोकार्पण तथा बहुआयामी लेखिका हिमाद्री समर्थ के अवदानों पर केंद्रित पुस्तक चर्चा को समर्पित रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुनीता त्रिपाठी के सुमधुर स्वर में प्रस्तुत ‘सरस्वती वंदना’ के साथ हुआ, जिसने संपूर्ण सभागार को आध्यात्मिक व साहित्यिक चेतना से आप्लावित कर दिया। समारोह की अध्यक्षता संस्थान की अध्यक्ष एवं ‘अनुकृति’ की संपादिका डॉ. जयश्री शर्मा ने की, वहीं आकाशवाणी की पूर्व कार्यक्रम प्रमुख रेशमा खान ने विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच को सुशोभित किया। कार्यक्रम का अत्यंत सधा हुआ और सारगर्भित संचालन प्रख्यात शिक्षाविद् एवं लेखिका डॉ. पुनीता द्वारा किया गया।
डॉ. जयश्री शर्मा ने ‘अनुकृति’ के विगत ढाई दशकों के संघर्षपूर्ण एवं उपलब्धिपूर्ण सफर को रेखांकित करते हुए बताया कि सन 2000 में रोपित यह बीज आज 102वें विशेषांक के रूप में वटवृक्ष का आकार ले चुका है। हिमाद्री समर्थ के साहित्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गद्य एवं पद्य दोनों ही धरातलों पर हिमाद्री जी का सृजन अत्यंत सशक्त है। विशेष रूप से पटकथा लेखन के क्षेत्र में उनकी यह विशिष्ट उपलब्धि है कि वे राजस्थान की प्रथम महिला लेखिका हैं जिनकी पटकथा पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित हुई है।
साहित्यिक चर्चा के सत्र में डॉ. कंचना सक्सेना ने हिमाद्री समर्थ के संपूर्ण साहित्य एवं विशेषांक की अंतर्वस्तु पर एक गहन शोध आलेख प्रस्तुत किया। डॉ. सुषमा शर्मा ने संस्थान की ध्येय-यात्रा और इसके युगीन साहित्यिक योगदान से सभागार को परिचित कराया। वहीं, डॉ. रेखा गुप्ता द्वारा विशेषांक में संकलित हिमाद्री जी की एक मर्मस्पर्शी कहानी के भावपूर्ण वाचन ने श्रोताओं को गहराई से आंदोलित किया।
विशिष्ट अतिथि रेशमा खान ने हिमाद्री समर्थ के आकाशवाणी से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए उनके उत्रोत्तर निखरते लेखन-ग्राफ और सुदृढ़ होते वैचारिक आत्मविश्वास की सराहना की। अपनी रचना-यात्रा के संस्मरण बाँटते हुए लेखिका हिमाद्री समर्थ ने भावुक स्वर में अपनी लेखन-प्रेरणा का श्रेय अपने पिता को दिया। उन्होंने अनुकृति के इस विशेषांक को अपने संपूर्ण साहित्यिक सफर का एक संजोया हुआ सुंदर दस्तावेज़ बताया।
कार्यक्रम के उत्तरार्ध में बीकानेर के वरिष्ठ साहित्यकार हरीश बी. शर्मा द्वारा लिखित पटकथा समीक्षा ‘दिल में बसे हो’ का वाचन जीनस कंवर द्वारा किया गया। डॉ. ज्योत्स्ना सक्सेना ने लेखिका के जीवन-दर्शन को रेखांकित किया, तो वहीं पवनेश्वरी वर्मा व रमा भाटी ने हिमाद्री जी की ग़ज़लों का रसास्वादन कराया। पूजा उपाध्याय ने उनकी कविता तथा सुनीता त्रिपाठी ‘अजय’ ने हिमाद्री जी की अब तक प्रकाशित कृतियों पर आधारित एक मनमोहक गीत की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
इस गरिमामयी संध्या में उमा सिंह, स्नेह लता सहाय, आशा अरोड़ा, आभा सिंह, डॉ. नेहल वैद्य, मनोरमा माथुर, अक्षिणी सहित साहित्य जगत के अनेक प्रतिष्ठित हस्ताक्षर व प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। समारोह का समापन संपादक डॉ. जयश्री शर्मा के इस भगीरथ प्रयास एवं हिमाद्री समर्थ के लेखकीय अवदान के प्रति उपस्थित साहित्यकारों की शुभकामनाओं और भूरि-भूरि प्रशंसा के साथ हुआ।




