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संतों के सान्निध्य से ही मिलता है विवेक और भगवान– रेनू संजय अनवरिया फतेहाबाद आगरा

अरुण शर्मा की रिपोर्ट

सनातन संस्कृति और भारत की आध्यात्मिक चेतना यदि आज है तो इसका श्रेय सिर्फ ऋषि मुनि और सतंजन को ही जाता हैl जो आपको सही और गलत का रास्ता दिखाता हैl

बिनु सत्संग विवेक न होई। राम कृपा बिनु सुलभ न सोई॥

संतो के द्वारा विवेक प्राप्त होता हैl संतो का महत्व समाज में सर्वोपरि है वे मानव जीवन को सही दिशा, नैतिकता और ईश्वर की भक्ति का मार्ग दिखाते हैंl उनके उपदेश से ही आपस में प्रेम और समाज से बुराइयों और अज्ञानता को दूर करके, शांति और भाईचारे की स्थापना करते हैंl
नवधा भक्ति में भगवान श्री राम ने माता शबरी को “प्रथम भक्ति” के बारे में बताया “प्रथम भक्ति संतन्ह कर संगा”
सच्चा संत बड़ी दुर्लभता से और भगवत कृपा से मिलता हैl भगवान श्री कृष्ण ने भी संतों की महिमा गाई हैl जिसका वर्णन भगवत गीता और उद्धव गीता में मिलता हैl संत संसार को पार लगाने वाले, सच्चे मार्गदर्शक, दया और करुणा के प्रतीक हैl
गुरु और संतों के संग का तात्पर्य है कि उनसे देह दृष्टि नहीं रखनी चाहिए, देह दृष्टि रखने से मनुष्य का पतन होता हैl गुरु के शब्द का, विचार का, भाव का संग किया जाना चाहिएl 18 वीं शताब्दी के लोग यह समझते हैं राइट ब्रदर्स के द्वारा विमान बनाया गया, जबकि हमारे शास्त्रों में चार या पांच हजार वर्ष पहले ऋषियों के द्वारा कामक विमान का वर्णन मिलता है महर्षि भारद्वाज को भारतीय विमान का जनक माना है! उनके यंत्र सर्वस्व नामक ग्रंथ में लिखा गया है जिसमें सभी प्रकार के यंत्र बनाने और चलने की विधि दी गई हैl
जो बात साइंटिस्ट आज बता रहे हैं मां के गर्भ में 3 महीने में लड़का या लड़की का पता चल जाता है, वह हजारों वर्ष पहले हमारे ऋषि मुनि बता चुके हैंl हमारे शास्त्रों में ऐसा विज्ञान पहले से लिखा हुआ है जिसे आधुनिक विज्ञान छू नहीं पाया हैl
आजकल ऐसी पोस्ट आ रही है हमारे कथाकार और भागवताचार्य लाखों रुपए कथा करने के ले रहे हैं, तो मैं उन लोगों से पूछना चाहूंगी हमारे फिल्मी कलाकार लाखों रुपए नहीं, बल्कि करोड़ों रुपए एक फिल्म बनाने के लिए ले रहे हैंl
जबकि अधिकतर कथाकारों के द्वारा भंडारे का आयोजन, गुरुकुल चलाना, गरीब कन्याओं की शादी, वृद्ध आश्रम, गौशाला चलाने, हॉस्पिटल बनाना जैसा अनेकों मानव धर्म का काम करते हैंl
तो दूसरी तरफ फिल्मी कलाकारों के द्वारा अधिकतर सभी पिक्चरों में शराब और सिगरेट पीना, गुटका, तंबाकू आदि फूडअता, अश्लीलता और नग्नता दिखाते हैं lजिससे हमारे बच्चे बहुत ही बुरी तरह प्रभावित होते हैं और अनेको अपराधों का जन्म देते हैंl कोई व्यक्ति शराब के मालिकों और जुआ खेलने वाले क्लब का भी विवरण दे कि उनके पास कितने करोड़ों की संपत्ति है? इसलिए हमें उनके पास नहीं जाना चाहिएl सभी देशवासियों से यही अपील करना चाहूंगी कि अपने बच्चों को पिक्चर दिखाने के साथ-साथ, कथा में भी ले जाया करेंl जिससे बच्चों में सद्गुणों और मानवता का विकास हो सकेl

रेनू संजय अनवरिया
फतेहाबाद आगरा

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