सास का पत्र नई बहू को) मेरी प्यारी बेहू (बेटी+बहू) बहुत सारा प्यार। — अलका गर्ग “अक्श “ गुरुग्राम

कैसी हो तुम..! मायके में मम्मी पापा भाइयों के साथ तुम खूब ख़ुश होगी।
पर यहाँ तुम्हारे बिना मेरा मन बिल्कुल नहीं लग रहा है।
कुछ ही दिनों में सभी को तुम्हारी आदत पड़ गई है।
तुम्हारी पायल चूड़ी गुच्छे की आवाज के बिना घर सूना लगता है।
रस्म है तो निभानी ही पड़ेगी वरना तुम्हारा शादी के बाद पाँव फेरने यूँ मायके जाना हम सभी को खल रहा है।
जानती हो तुमको गए हुए एक सप्ताह बीत गया अभी तक मैंने एक भी फ़िल्म नहीं देखी।अकेले जाने का मन नहीं करता।
तुम होती तो हम दोनों अब तक तीन देख चुके होते।
अपने-अपने पतियों से छिपकर फ़िल्म देखने शॉपिंग और होटल में खाने का मज़ा ही कुछ और है…हाँ ये बात और है कि तुमको कई फ़िल्में अपने पति के साथ दोबारा देखनी पड़ जाती है। पर कोई बात नहीं चोरी की थोड़ी बहुत सजा तो भुगतनी ही पड़ती है।
तुमको याद है ना कैरम के खेल में मैं तुमसे १९ पॉइंट आगे थी।आओगी तब वहीं से गेम शुरू करना है। ये मत बोलना कि उसको तो बहुत दिन हो गए नया गेम शुरू करते हैं।
ताश में तुम्हारे ससुर जी बहुत बेईमानी करते हैं। उनकी जोड़ी तुम्हारे साथ ही ठीक रहती है तुमसे ही दबते हैं मुझसे तो रोज ही झगड़ा हो जाता है।
वैसे तुम्हारी मेरी जोड़ी तो पड़ोसियों और रिश्तेदारों के लिए बिल्कुल ठीक है। जरा कोई कुछ उल्टा बोल तो दे …हम दोनों मिल कर उसकी कैसी खबर लेते हैं ना…
तुम्हारे जाने से मेरा चाय पीना भी कम हो गया है। क्या करूँ दो-तीन बार तो तुम्हारे नाम का बहाना ले कर बना लेती थी कि बेहू को भी पीने का मन है।
ठाकुरदास और अविनाश का फ़ोन आया था साड़ी और सैंडल्स का नया स्टॉक आया हुआ है …कब आयेंगी। अब उनको क्या बताऊँ कि मेरा जोड़ीदार अभी नहीं आया है।
कल “ मुग़ले आज़म “का l P G record ख़रीद कर लाई अभी तक १३ बार सुन चुकी हूँ पर मन ही नहीं भरा।
तुम्हारी बनाई हुई बंगाली खिचड़ी खाने का मन हो रहा है हमारे यहाँ से बिल्कुल अलग और बढ़िया स्वाद वाली होती है।
जल्दी से आ जाओ बेहू..कब आओगी..दो तीन दिन पहले बता देना तो साड़ी ज्वेलरी वाले को फ़ोन कर दूँगी और पहले दिन ही फ़िल्म की टिकट बुक करा लूँगी।
मम्मी पापा को मेरी सादर नमस्ते कहना।
दोनों भाइयों को प्यार।
तुम्हारे अति शीघ्र लौटने की प्रतीक्षा में..
तुम्हारी सासू माँ
अलका गर्ग “अक्श “
गुरुग्राम




