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कार्यशाला में सतत मल-कीचड़ प्रबंधन और ग्रामीण-शहरी समन्वय पर मंथन

 

नानालाल आचार्य
इंडिया जागरण टुडे

उदयपुर। स्थानीय निकाय निदेशालय, राजस्थान एवं सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के संयुक्त तत्वावधान में उदयपुर में सतत मल-कीचड़ प्रबंधन, संयंत्रों की क्षमता के अनुरूप उपयोगिता, ग्रामीण-शहरी समन्वय तथा संचालन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों के अधिकारियों एवं अभियंताओं ने भाग लेकर स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला का शुभारंभ स्वच्छता अभियान के ब्रांड प्रतिनिधि के.के. गुप्ता, संयुक्त निदेशक मुरारी लाल शर्मा, अधीक्षण अभियंता नगर निगम उदयपुर लखन लाल बैरवा, डॉ. गौरव सिंह तथा सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के निदेशक सुब्रत चक्रवर्ती सहित अन्य अधिकारियों ने किया।
कार्यशाला में सत्यनारायण वर्मा ने राजस्थान में मल-कीचड़ प्रबंधन की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी। वहीं संयुक्त निदेशक मुरारी लाल शर्मा एवं सहायक अभियंता डॉ. गौरव सिंह ने ग्रामीण एवं शहरी स्वच्छता अभियानों के बीच समन्वय तथा उपयोग किए गए जल के प्रबंधन की प्रदेश में वर्तमान स्थिति पर प्रस्तुतीकरण दिया।


सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की ओर से ज्योतिप्रसाद एवं डॉ. सुमिता सिंघल ने प्रदेश के नगरीय निकायों की क्षमता बढ़ाने तथा मल-कीचड़ प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। सलाहकार धेनु खट्टर ने मल-कीचड़ प्रबंधन के लिए प्रस्तावित क्षमता विकास कार्यशालाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा प्रतिभागियों से सुझाव प्राप्त किए। इसी क्रम में राहुल बंसीवाल, सूचना, शिक्षा एवं संचार प्रभारी, स्वच्छ भारत मिशन शहरी ने नगरीय निकाय स्तर पर आमजन को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने तथा विभिन्न नवाचारों की जानकारी साझा की।
कार्यशाला में उत्तर प्रदेश एवं ओडिशा से आए विशेषज्ञों ने बिना भूमिगत मल निकासी व्यवस्था वाले क्षेत्रों में स्वच्छता प्रबंधन तथा मल-कीचड़ प्रबंधन के सफल अनुभव साझा किए। साथ ही उपचारित जल एवं जैव ठोस पदार्थों के पुनः उपयोग तथा मल-कीचड़ प्रबंधन से जुड़ी आधारभूत संरचनाओं के संचालन, शासन एवं निगरानी व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला में प्रदेश के 70 से अधिक नगरीय निकायों के नोडल अधिकारी एवं अभियंता शामिल हुए। प्रतिभागियों ने विभिन्न तकनीकी विषयों पर चर्चा करते हुए स्थानीय स्तर पर स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव भी रखे। कार्यशाला का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ।

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