उस दिन मैं कुछ और कर सकता था। राजेन्द्र परिहार “सैनिक”

जीवन में कभी कभी ऐसी घटनाएं घटित हो जाती है,जब
हम अपना आपा खो बैठते हैं। आवेश में कुछ ऐसा कर
जाते हैं,कि बाद में पश्चाताप के सिवाय कुछ नहीं रह जाता।
इसे मानवीय मनोभावों का लक्षण मानें या गलती मानें..हो
ही जाता है।
ऐसी ही एक घटना मेरे जीवन में भी घटित हुई थी, अथवा
यह कहें कि ऐसी महा-भूल जिसका मुझे बाद में बहुत बड़ा पश्चाताप हुआ। हुआ यूं कि मैं और मेरी बहन बाजार से कुछ
पाठ्य-पुस्तकें खरीद कर घर की ओर चले आ रहे थे।
अकस्मात् एक लड़के ने मेरी बहन की तरफ कुछ इशारा किया,
अब क्या इशारा किया मुझे नहीं समझ में आया और मेरा
ख़ून खौल उठा। जब मुझे क्रोध आ जाता था तो अपना आपा
खो देता था। स्वाभाविक रूप से उस समय भी वही हुआ, मैंने
उसकी धुनाई शुरू कर दी,, मेरी बहन बीच में आकर कुछ
कहना चाह रही थी, किन्तु मुझे कुछ सुनाई नहीं दिया और
आवेश में बहन को भी धक्का देकर दूर कर दिया।बहन भी
सहमकर चुपचाप खड़ी रही। जब कि वो लड़का बार बार
यही गुहार कर रहा था कि भाई मेरी बात तो सुन लो एक
बार,, लेकिन वो जितनी सफाई देता गया,मैं उतना ही उसे
मारता चला जा रहा था। आखिर में वह लहुलुहान हो गया
और लोगों ने आकर बीच-बचाव किया। मेरी क्रोधाग्नि अब
भी ठंडी नहीं हुई थी और उसे गालियां देते हुए चल पड़ा।
बहन चुपचाप रुआंसी सी मेरे साथ चलती रही। हम दोनो
घर पहुंच गए,मेरा गुस्सा अब कुछ शांत हो चुका था किन्तु
अब बहन गुस्से में मुझसे पूछने लगी “भैया आपने उस लड़के
को क्यों मारा ?? मैंने कहा वो तुम्हारी तरफ कुछ इशारा कर
रहा था इसलिए मैंने उसकी धुनाई कर दी। बहन शांत स्वर
में कहने लगी “भैय्या जोश में होश मत खोया कीजिए!!..
पता भी है कि वो लड़का कौन है और उसने क्या इशारा किया
था। वो लड़का हरीश है और बहुत सीधा साधा लड़का है,
और मेरी ही कक्षा में पढ़ता था। मैं अक्सर कक्षा में तुम्हारी
तारीफ़ किया करती थी।कहा करती थी मेरा भाई इतना
अच्छा है होशियार है और स्मार्ट भी है तो पूरी कक्षा के
स्टुडेंट बहुत प्रभावित हुए थे और एक बार तुमसे मिलाने
की बात किया करते थे। जब हरीश ने मुझे तुम्हारे साथ में
देखा तो इशारे से यही जानना चाह रहा था कि क्या यही
है तुम्हारा भाई.?? वो तुमसे मिलना भी चाह रहा था कि
तुमने तो बिना जाने,, बिना कुछ सोचे-समझे उसकी धुनाई
शुरू कर दी! ना उसकी बात सुनी और ना ही मेरी बात को
सुना। मैंने बीच बचाव किया तो मुझे भी धक्का देकर गिरा
दिया। मैं जानती हूं कि तुम्हारा क्रोध बहुत ख़तरनाक है!
इसलिए मैं डर के मारे कुछ भी नहीं बोल पाई। जरा सोचिए
कल क्लास में मैं क्या मुंह दिखाऊंगी,जिस भाई कि तारीफ
किया करती थी। वही भाई ऐसा है कि बिना सोचे समझे
ही गुण्डे की तरह मार-पीट शुरू कर देता है। तुम्हारे छवि
तो धूमिल हो ही चुकी है और मुझे भी कितनी शर्मिंदगी
झेलनी पड़ेगी। बहन बोले जा रही थी और मैं मन ही मन
में ग्लानि महसूस कर रहा था। हिम्मत करके मैंने कहा
बहन आपने तब क्यों नहीं बताया?? बहन ने पूछा “क्या
मुझे कुछ बताने का मौका दिया था तुमने.?? मेरे पास
कहने को कुछ नहीं बचा था। मैं चुपचाप अपने कमरे में
चला आया और अब महसूस हुआ कि अंजाने में ही मैं
कितनी बड़ी भूल कर बैठा था। पश्चाताप के आंसू आंखों
से बहे जा रहे थे। उस लड़के की दयनीय हालत मेरी आंखों
के सामने बार बार आ रही थी और उसकी गुहार “भाई मेरी
बात तो सुन लो एक बार ” जैसे मेरे चेहरे पर चांटे मारती
हुई महसूस हो रही थी।
काश! उस दिन मैं कुछ और कर सकता था।उस
घटना का पश्चाताप इतना हुआ कि मैंने बहन से क्षमा मांगी।
यह भी कहा कि उस लड़के से मैं बिना शर्त माफ़ी मांग लूंगा।
किंतु माफ़ी मांगने का अवसर ही नहीं मिला,,पता लगा कि
वो लड़का उसी दिन अपने गांव लौट कर चला गया, वापस
ही नहीं हुआ। जब कभी #आत्ममंथन करता हूं तो मन ग्लानि
से भर उठता है।
राजेन्द्र परिहार “सैनिक”




