चिंता – रमेश शर्मा

आज रीटा जी कुछ उदास सी घर पर अकेले फुर्सत से बैठीं थीं । रीटा जी हाल ही में एक प्रतिष्ठित प्राइवेट पब्लिक स्कूल से रिटायर हुई हैं।पतिदेव श्रीकांत जी एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हैं। सुबह दस बजे आफिस केलिएनिकल जाते हैं।शाम साढ़े पांच बजे आफिस से आते हैं। एक चाय दोनों साथ पीते हैं। दिनभर के बीते समय को लेकर संक्षिप्त चर्चा होती है।
काफी सालों के बाद उन्हें यह फुर्सत का समय मिला है । दो बच्चे हैं एक बेटा एक बेटी दोनों को उन्होंने कड़ी मेहनत करके इंजीनियर बनाया दोनों की अच्छे परिवार में शादी की । दोनों अपनी अपनी गृहस्थी में मस्त हैं। हर दूसरे दिन दोनों से बात हो जाती है।
कब नौकरी के अठ्ठाईस साल निकल गए पता ही नहीं चला।।
रीटा जी ने अब अपने समय का उपयोग बागवानी के अपने शौक को पूरा करने में लगाने का निश्चय किया। उन्होंने बाजार से गमले लाकर उनमें अलग अलग तरह के सुंदर फूलों के पौधे लगाये। साथ में घर पर कबाड़ में पड़े खाली प्लास्टिक के डिब्बों को अलग अलग डिजाइन में काटकर उन्हें पेंट करके नया स्वरूप दिया और उनमें फूलों के पौधे लगा दिए।
कुछ ही दिनों में उनकी मेहनत रंग लाई और बगिया में रंग बिरंगे फूलों की बहार आ गई। घर पर जो भी मिलने आता उनकी बगिया को देख कर उनकी मेहनत की तारीफ किये बिना नहीं रहता।
अब वे खुश थी उनका समय अच्छे से कट रहा था और शौक भी पूरा हो रहा था
रमेश शर्मा




