बाल कलाकारों ने मंच पर जीवंत की नाट्यशास्त्र की गाथा, अभिनय से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक

अरविंद शर्मा। जागरण इंडिया टुडे ब्यूरो चीफ
लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी के रंगमंच पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में नागरी नाटक मंडली, वाराणसी एवं भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ की ओर से प्रस्तुत नाट्य मंचन ने दर्शकों को भारतीय रंग परंपरा की गौरवशाली विरासत से रूबरू कराया। बनारस से आए बाल कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भारतीय रंग परंपरा पर आधारित इस नाटक में नाट्यशास्त्र की उत्पत्ति और उसके महत्व को अत्यंत रोचक एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। नाटक में दर्शाया गया कि किस प्रकार ब्रह्मा ने चारों वेदों के सार से नाट्यवेद की रचना की और महर्षि भरतमुनि के माध्यम से उसे मानव समाज तक पहुंचाया। संवाद, अभिनय, संगीत और भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने पूरे मंचन को जीवंत बना दिया। प्रस्तुति के दौरान सभागार कई बार तालियों की गूंज से गूंज उठा।
इस नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन सुश्री सुमन पाठक ने किया। उनके निर्देशन में बाल कलाकारों ने अपने-अपने पात्रों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंच पर साकार किया। कार्यक्रम में मिर्जापुर से आए 10 वर्षीय बाल कलाकार गुरु,
दीपिका ,यादवी, और अन्नया
ने दानव के दमदार अभिनय, से विशेष पहचान बनाई।
नाटक में दीपिका, अमृत, अनायरा, जय वर्धन, नैतिक, वर्ष रमन, सबी शर्मा, सत्यम, श्लोक, ईशान, लक्ष्य और अर्नव सहित सभी बाल कलाकारों ने पूरे समर्पण और अनुशासन के साथ अपने पात्रों का सशक्त निर्वहन किया। मंच पर उनकी ऊर्जा, भारतीय संस्कृति के प्रति लगाव और अभिनय कौशल ने यह सिद्ध कर दिया कि उचित प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर बाल प्रतिभाएं भी बड़े कलाकारों की तरह अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
प्रस्तुति की भव्यता बढ़ाने में मंच सज्जा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। दीपक यादव, यश वर्धन दूबे और निखिल ने मंच सज्जा को आकर्षक एवं प्रभावशाली स्वरूप देकर नाटक को और अधिक जीवंत बनाया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित दर्शकों ने सभी कलाकारों, निर्देशिका और प्रशिक्षकों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, साहित्य और रंगमंच की गौरवशाली परंपरा से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।
भारतेंदु नाट्य अकादमी में आयोजित यह प्रस्तुति केवल एक नाटक नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और बाल प्रतिभाओं के अद्भुत संगम का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई। उत्कृष्ट अभिनय, प्रभावशाली निर्देशन और सशक्त मंचन ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।




