वो यादें रक्षा रक्षा बंधन की – रमेश शर्मा

आज फिर रक्षा बंधन पर मुझे अपनी बहन मंजू जीजी की बहुत याद आई। वे खुर्जा में रहती हैं और मैं जयपुर में रहता हूँ। रक्षा बंधन पर कभी वो आ जाती थी कभी मैं चला जाता था। वर्षों से यही सिलसिला चल रहा था,
पिछली बार रक्षा बंधन पर उन्होंने मुझे खुर्जा आने के लिए कहा । लेकिन इस बार गंभीर परिस्थितियों से मैं घिरा हुआ था। एक तरफ दोनों बच्चों की फीस जानी थी जो कालेज में पढ रहे थे और दूसरी तरफ कंपनी से तनातनी चल रही थी। तीन महीने से सैलरी रूकी हुई थी।
बड़ी असमंजस में था। मैंने जीजी से कहा इस बार मैं नहीं आ पाऊंगा मुझे राखी के दूसरे दिन पूना मीटिंग में जाना है। न जाने कैसे वो मेरी आवाज से समझ गई कि कुछ तो गड़बड़ है यह कुछ छुपा रहा है। उन्होंने मुझसे कहा कोई बात नहीं।
लेकिन रक्षाबंधन के दिन सुबह वो जयपुर आ गई। उनको अचानक घर पर देखकर मैं सकपका गया। हम सभी नहा धोकर राखी बांधने के लिए तैयार हुए। राखी बांध कर उन्होंने पूछा सच बता बात क्या है। तब मैंने उन्हें पूरी बात बताई। उन्होंने कहा कोई बात नहीं। सब ठीक हो जायेगा।
खुर्जा पहुँच कर उन्होंने मुझे बच्चों की फीस के पैसे भेज दिए। इस दौरान एक मित्र की सहायता से मैंने दूसरी कंपनी जोईन कर ली।
आज मुझे रक्षाबंधन पर पिछली राखी की याद आई तो आखें भर आईं।
रमेश शर्मा




