Welcome to इंडिया जागरण टुडे   Click to listen highlighted text! Welcome to इंडिया जागरण टुडे
Uncategorized

सच्ची स्वतन्त्रता क्या है – डॉ.शुचिता नेगी “शुचि” की कलम से

 

पराधीन सपने सुख नाही। जीवन में दुःख और अशांति का मूल कारण है पर तन्त्र होकर जीना। जब हम अंतर्मन या अंतरात्मा की आवाज नहीं सुनते हैं औऱ बाहर से आने वाली परिस्थतियों में मन पर वश हो जाता है तो हम स्वयं क़ा तंत्र, अपनी स्वतन्त्रता को खो बैठते हैं। स्वतन्त्रता संग्राम में अनेक वीर महान पुरुषो ने अपना अमूल्य योगदान दिया था परंतु सुभाष चंद्र बोस का योगदान और उनके विचार अतुलनीय थे । उनका मानना था कि जैसे वक़ील डॉक्टर बनने के लिये उचित शिक्षा और पात्रता आवश्यक है वैसे ही जिनके हाथों में स्वतंत्र भारत के शासन की बागडोर होगी ,उन्हें भी शासन चलाने की उचित शिक्षा औऱ पात्रता प्राप्त करनी होगी। सुभाष चन्द्र बोस ने अपने साथियों को ईमानदारी, निर्भयता ,देश के लिये समर्पणता और स्व अनुशासन का पाठ पढ़ाया था और सही अर्थों में वही पहली सच्ची स्वतंत्रता थी ,भले ही देश बाहर से उस समय पर तन्त्र था ।आज हम कहने को तो स्वतंत्र हैं लेकिन वास्तव में कोई भी स्वतंत्र नहीं है अर्थात स्वंम पर स्वंम का तन्त्र या अनुशासन नहीं है। जिसका स्व अनुशासन ही नहीं वह दूसरों को शासन या नियंत्रण में कैसे रख सकेगा। वास्तव में स्वतंत्र भारत की पहचान , स्व अनुशासित भारतवासियों द्वारा ही स्थापित होकर रहेगी तभी भारत सोने की चिड़िया कहलायेगा।

डॉ.शुचिता नेगी “शुचि”

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!