हिसाब बराबर हुआ- रमेश शर्मा

दीनानाथ जी जलदाय विभाग से रिटायर हुए थे। उनके दो लड़के और एक लड़की थी। तीनों को उन्होंने अच्छे से पढ़ालिखा कर अच्छे घरों में शादियां कर दी थी।
उनका बड़ा बेटा राकेश दिल्ली में स्टेट बैंक आफ इंडिया में ब्रांच मैनेजर था। उससे छोटी लड़की शिखा जोधपुर विश्व विद्यालय में राजनीति शास्त्र विभाग में लेक्चरर थी। उसके पति रवि जी जोधपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर थे। छोटा बेटा विजय पूना में मल्टी नेशनल कंपनी में सोफ्टवेयर इंजीनियर था और उसकी पत्नी भी उसके साथ उसकी ही कंपनी में सोफ्टवेयर इंजीनियर थी।
दीनानाथ जी ने सोचा थोड़े दिन बड़े बेटे और थोड़े दिन छोटे बेटे के पास रहेंगे। बाकी जयपुर में दोनों पति पत्नी स्वतंत्र रहेंगे।
ऐसा सोचकर वे बड़े बेटे के पास दिल्ली गए। वहाँ शुरू में सबकुछ ठीक रहा फिर घर के सब सदस्य अपने आप में बिजी रहने लगे। उन्हें यह उपेक्षा पूर्ण व्यवहार अच्छा नहीं लगा। और वे दोनों जयपुर आ गए। कुछ दिन चिंता में रहे फिर उन्हें एक विचार आया कि क्यों नहीं अपने जैसे रिटायर लोगों के लिए एक अपने घर में होस्टल खोल लें। उनकी पत्नी को भी यह विचार पसंद आया और उन्होंने अपने दस कमरों के मकान में होस्टल खोल दिया एक सर्वे क्वार्टर बना कर उसमें एक पति पत्नी को रख लिया वे दोनों खाना सफाई और अन्य व्यवस्था देख लेते थे।
इस तरह उनकी जिंदगी बढ़िया चलने लगी। उन्होंने एक ट्रस्ट बना कर अपनी सारी संपत्ति ओल्डऐज होम्स के नाम कर अपने बेटों को भी सबक सिखा कर हिसाब बराबर कर लिया।
रमेश शर्मा




