राष्ट्रगान में राजस्थान का नाम क्यों नहीं है?’ – -डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’ अहमदाबाद,गुजरात।

भारत के राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ में पंजाब, सिंधु, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल और बंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों के नाम आतें हैं, लेकिन राजस्थान का नाम सीधे तौर पर नहीं आता। इसका कारण यह है कि राष्ट्रगान आधुनिक भारत के राज्यों की सूची नहीं है, बल्कि भारत की भौगोलिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधता का काव्यात्मक चित्रण है।
जब रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने ‘जन-गण-मन’ की रचना की, तब आज के राजस्थान का वर्तमान राजनीतिक स्वरूप अस्तित्व में नहीं था। यह क्षेत्र अनेक देशी रियासतों में विभाजित था और व्यापक रूप से राजपूताना के नाम से जाना जाता था। इसलिए ‘राजस्थान’ शब्द का राष्ट्रगान में न होना स्वाभाविक है। स्वतंत्रता के बाद विभिन्न रियासतों के एकीकरण से राजस्थान का वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। राष्ट्रगान में आए अन्य शब्द भी केवल आज के राज्यों के नाम नहीं हैं। ‘पंजाब’ उत्तर-पश्चिम भारत के ऐतिहासिक क्षेत्र को दर्शाता है। ‘सिंधु’ सिंधु नदी और सिंध क्षेत्र की ओर संकेत करता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा आज पाकिस्तान में है। ‘गुजरात’ पश्चिमी भारत के गुजरात क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। ‘मराठा’ मराठी-भाषी एवं मराठा सांस्कृतिक क्षेत्र का संकेत है। ‘द्रविड़’ दक्षिण भारत के व्यापक द्रविड़ सांस्कृतिक-भाषायी क्षेत्र को दर्शाता है। ‘उत्कल’ मुख्यतः वर्तमान ओडिशा का प्राचीन नाम है, जबकि ‘बंग’ ऐतिहासिक बंगाल क्षेत्र का संकेत है।
इसी कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा, असम, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे अनेक वर्तमान राज्यों के नाम भी राष्ट्रगान में अलग-अलग नहीं मिलते।
राष्ट्रगान आगे “विंध्य हिमाचल यमुना गंगा, उच्छल जलधि तरंगा” कहकर भारत के पर्वतों, नदियों और समुद्र को एक साथ जोड़ता है। यह किसी प्रशासनिक मानचित्र की सूची नहीं, बल्कि भारत की अखंड आत्मा, विविधता और राष्ट्रीय एकता का काव्यात्मक स्वरूप है।
अतः राजस्थान का नाम राष्ट्रगान में भले ही सीधे न हो, लेकिन राजस्थान सहित भारत का प्रत्येक प्रदेश इसकी भावना में समान रूप से समाहित है। राष्ट्रगान हमें राज्यों की सीमाओं से ऊपर उठकर “एक भारत” की अनुभूति कराता है।
-डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद,गुजरात।




