औरत ( में गर्व से कहती हु में एक औरत हु ) – नीलम सोनी फॉर्म,(ब्यावर )
एक औरत में नौ रूपी देवी समाहित है। औरत में पूरी दुनिया समाई हुई हैं। औरत वक्त आने पे मां भगवान को भी अपनी कोख में रखने की ताकत रखती है। अपने रक्त से एक बच्चे नो महीने अपने पेट में सीच के दुनिया में लेके आती हैं।केवल एक औरत में होती हैं । में गर्व से कहती हु में एक औरत हु।सुबह 4 बजे भी उठ कर अपने घर का काम भी करके बच्चों को भी संभाल कर बाहर नौकरी पे जाके वापस अपने घर के काम पे आती हु। जो अन्दर से टूटने के बाद भी।बाहर से जुड़ी होती है। वो केवल एक औरत होती है। बच्चों का घर का सबका खाना खिला के न बचने पे भी।अपने आप का पेट भरा रखती है। वो एक औरत होती है। कितना भी बीमार हो । पर सबके लिए एक आवाज देते । सामने हाजिर हो जाती है।वो एक औरत होती। घर में सबकी कटी जली सुनने के बाद भी सबकी मार खाने के बाद भी वापस से खड़ी हो जाती। में गर्व से कहती हु में औरत हु। भगवान ने औरत को कोमल बनाया। कितने भी बुरे हालत हो।उसे लड़ के उतनी मजबूत बनती है।दुनिया कुछ भी कहे । औरत को इतना कमजोर नई समझना चाहिए।औरत में इतनी ताकत होती। वो असंभव को संभव बना देती है। बहुत से लोग दुनिया में औरत को एक चीज मानते है। केवल औरत गर का काम करने और बच्चों को संभालने ।और अपनी मन की भड़ास निकलने की चीज है। औरत कोई चीज नई है। बहुत से लोगों को धारना रहती औरत है। कुछ नई कर सकती हैं। औरत बहुत कमजोर होती है। औरत कभी कमजोर ना होते हुए भी झुक जाती है।अपने घर परिवार की इज्जत बचाने के लिए।औरत से ज्यादा ताकत किसी में नहीं होती है। औरत सबसे ज्यादा सहनशक्ति करती है। तुम्हारा वंश बढ़ाने की ताकत किसी में नहीं होती है। कवेल एक औरत ही कर सकती है। में गर्व से कहती हु कि मैं एक औरत हु। औरत की ताकत बस इतनी । उसे मकान दो ,घर बना देगी। अनाज दो खाना बना देगी। उसे प्यार से बात करो उसको रेस्प्ट करो तो वो अपना सब कुछ आप पे लुटा देगी। औरत को चांद तारों की जरूरत नहीं। बस इज्जत और प्यार की जरूरत होती है। में एक औरत होने के नाते औरत को सामान देना चाहूंगी। क्योंकि हर औरत मां , बहन,पत्नी,बेटी होने से पहले वो एक औरत है। पहला सामान उस औरत का होना चाहिए। ना कि रिश्ते का। औरत जितनी बाहर से शांत नजर आती है।उतनी अन्दर से एक सुनामी है। एक अंदर आग है। औरत एक कस्ती के जैसे है।औरत की पूरी जिंदगी एक किनारे से दूसरे किनारे में निकल जाती । पर आज तक समझ नई आया। उसका खुद का घर कौनसा अपना है । औरत होना इतना आसान नहीं होता। हजारों ख्वाइश, सपने इच्छाएं अपने अंदर दफनाने पड़ते अपने अंदर। औरत के लिए जिंदगी में सबसे भारी कोई पहाड़ या पर्वत नहीं। ना उसका भारी मन। बस उसके लिए सबसे भारी उसके माथे का वो घूंघट। जिसको संस्कारों का नाम देके चुप करवाया जाता। उस। घूंघट के पीछे उस औरत की सारी योग्यता कला प्रतिभा उसके सपने इच्छाएं। सब वही दबा दी जाती है।घर के क्या कहेंगे। समाज क्या बोलेगा। उसे एक जिंदा लाश बना के छोड़ देता ये समाज । एक औरत कभी घर के बाहर के काम से नहीं थकती। बस थकती है तो अपनो के द्वारा उसका शब्दों जो उसे अंदर तक तोड़ देते है। जो उसके लिए बोले जाते। लोग औरत को घर की इज्जत कहते है।फिर क्यों इज्जत को इज्जत देना भूल जाते है । इस दुनिया को यही कहूंगी। सभी लोगों से यही कहूंगी। औरत को कुछ नई चाहिए बस उसे कवेल इज्जत देना शुरू कर दो।आपकी मां बहन बेटी एक औरत है।
नीलम सोनी फॉर्म,(ब्यावर )




