नारायणी साहित्य अकादमी ने मनाई नामवर सिंह की शताब्दी, साहित्यकारों और शिक्षकों का हुआ सम्मान

नई दिल्ली, 26 जुलाई। नारायणी साहित्य अकादमी, भारत द्वारा रविवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में हिंदी के मूर्धन्य आलोचक एवं चिंतक प्रो. नामवर सिंह की जन्मशती के उपलक्ष्य में “नामवर शताब्दी समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, पत्रकारों तथा साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं श्रीमती रजनीश गोयल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। प्रथम सत्र का संचालन ललित मोहन जोशी ने किया इसके पश्चात “आलोचना के क्षेत्र में नामवर” विषय पर आयोजित परिचर्चा में प्रो. ओम प्रकाश सिंह (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय), प्रो. विजय सागर सिंह (मोतीलाल नेहरू कॉलेज), प्रो. सुधीर प्रताप सिंह (जेएनयू), प्रो. राम जन्म शर्मा (एनसीईआरटी) तथा डॉ. रमा शर्मा (प्राचार्य, हंसराज कॉलेज) ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने नामवर सिंह के आलोचना-कर्म, हिंदी साहित्य में उनके अविस्मरणीय योगदान तथा नई पीढ़ी के लिए उनकी वैचारिक विरासत पर विस्तार से प्रकाश डाला।
नागरी प्रचारिणी सभा देवरिया उत्तर प्रदेश को भी सम्मानित किया गया,डा.अनिल त्रिपाठी महामंत्री ने यह सम्मान ग्रहण करते हुए मंच से अपना वक्तव्य देते हुए इस सवा सौ वर्ष पुरानी संस्था के संदर्भ में भी जानकारी साझा किया।दोपहर के सत्र में विभिन्न साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा वरिष्ठ साहित्यकारों और शिक्षाविदों का सम्मान किया गया। इसके बाद पुस्तक विमोचन का आयोजन हुआ तथा साहित्य, शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया।
इस सत्र में रघुवीर शर्मा,वरिष्ठ साहित्यकार,डॉ दर्शनी प्रिय, वरिष्ठ पत्रकार,वरिष्ठ कवि दिनेश जैसे वक्ताओं ने प्रोफेसर नामवर सिंह के संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए। डॉ दर्शनी प्रिय ने प्रोफेसर नामवर सिंह को हिंदी साहित्य आलोचना के इतिहास का एक मजबूत स्तंभ बताया और उन्हें कालजयी आलोचक बताते हुए उनके कृतित्व पर प्रकाश डाला।समारोह के समापन अवसर पर डॉ. पुष्पा सिंह विसेन ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि नामवर सिंह का चिंतन हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है और उनकी वैचारिक विरासत नई पीढ़ी को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।इस अवसर पर नारायणी साहित्य अकादमी, भारत के महासचिव प्रदीप समनाक्षर, अध्यक्ष माही मुंतज़िर सहित अनेक गणमान्य साहित्यकार, शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी आलोचना की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाना तथा साहित्यिक संवाद को और अधिक सशक्त बनाना रहा।




