गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में सन्त बाल शरण व्यास जी के सान्निध्य में 1100 आहुतियों के साथ हुआ भव्य हवन

गौसेवा और सुंदरकाण्ड पाठ से गुंजायमान हुई वीर तेजाजी गौशाला
जयपुर। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वीर तेजाजी गौशाला, सुरपुरा (बोराज), में प्रख्यात रामकथा वाचक सन्त बाल शरण व्यास जी के सान्निध्य में भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिला। श्री रामपुरी, निवारू रोड के श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से 1100 आहुतियों के साथ वैदिक हवन में भाग लिया। विद्वान आचार्यों एवं पंडितों ने विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन संपन्न कराया। हवन के उपरांत श्रद्धालुओं ने गौशाला में पहुंचकर गौमाता की सेवा एवं संरक्षण के लिए योगदान दिया। इसके बाद भक्तिमय वातावरण में सुंदरकाण्ड पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और मातृशक्ति ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। इस अवसर पर अपने प्रेरणादायी प्रवचन में सन्त बाल शरण व्यास जी ने गौमाता के आध्यात्मिक, धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म में गाय को माता का स्थान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि गाय का केवल दूध ही नहीं, बल्कि उसका गोबर और गोमूत्र भी औषधीय गुणों से भरपूर है तथा मानव कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सनातन धर्म की महिमा का वर्णन करते हुए व्यास जी ने कहा कि आकाश, पृथ्वी और पाताल तक सनातन व्याप्त है। सूर्य, चंद्रमा और समस्त सृष्टि सनातन के ही स्वरूप हैं। सनातन केवल एक धर्म नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के जीवन का शाश्वत आधार है। उन्होंने कहा कि जो लोग सनातन संस्कृति का अपमान करते हैं, वे अपने संस्कारों से विमुख हैं और उन्हें सनातन की वास्तविक महिमा का ज्ञान नहीं है। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने सन्त बाल शरण व्यास जी से आशीर्वाद प्राप्त कर धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर भंवर लाल शर्मा , सूरज शर्मा, कैलाश खुटेटा, कैलाश गुप्ता, विष्णु टांक, प्रेम धवन पाराशर, सज्जन सोनी विशन सिंह , कैलाश शर्मा, बनवारी सोनी, परुषोत्तम सर्वा , जेलर सतीश सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में मातृशक्ति की सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया।




