प्रतिष्ठित शिक्षाविद डॉ. कंचन जैन – बड़नगर में हिंदी दिवस के अवसर पर ‘साहित्य गौरव’ की मानद उपाधि से सम्मानित

बड़नगर, जिला उज्जैन (म.प्र.) हिंदी दिवस के ऐतिहासिक अवसर 14 सितंबर 2026 पर साहित्य, संस्कृति और समाज सेवा की त्रिवेणी बड़नगर में प्रवाहित हुई। पंजीयन क्रमांक 3220,2001 से सतत साहित्य-साधना में रत प्रतिष्ठित संस्था डॉ. जयकिरण शोध शिक्षण संस्थान, बड़नगर जिला उज्जैन द्वारा इस वर्ष का सर्वोच्च ‘साहित्य गौरव’ सम्मान अलीगढ़, उत्तर प्रदेश की साहित्यकार, चिंतक और समाजसेविका श्रीमान डॉ. कंचन जैन को प्रदान किया गया।
संस्थान का यह सम्मान पत्र केवल एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती पर एक वैचारिक टिप्पणी है। सम्मान पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि “वर्तमान समय में, जहाँ समाज निरंतर नई-नई चुनौतियों से रूबरू हो रहा है और रिश्ते व मानवता हाशिए पर जा रही हैं, ऐसे वातावरण में आपके द्वारा साहित्य के माध्यम से समाज निर्माण का ऐतिहासिक कार्य किया जा रहा है, जो अत्यंत सराहनीय एवं वंदनीय है।”
यह पंक्ति ही इस सम्मान की आत्मा है। आज जब तकनीक ने लोगों को जोड़ा है पर दिलों में दूरी बढ़ी है, ऐसे में डॉ. कंचन जैन की उत्कृष्ट लेखनी समाज को नई दिशा एवं चेतना प्रदान कर रही है।
अलीगढ़ धरती से साहित्य की अलख जगाने वाली डॉ. कंचन जैन केवल एक लेखिका नहीं, एक विचार आंदोलन हैं। उनकी रचनाओं में स्त्री-चेतना, मानवीय संबंधों की पड़ताल और निर्धन वर्ग के उत्थान का स्वर प्रमुखता से गूंजता है। साहित्य को उन्होंने कभी कल्पना की उड़ान नहीं, बल्कि समाज निर्माण का औजार बनाया है। इसी पावन योगदान के प्रति नतमस्तक होते हुए संस्थान ने उन्हें यह गौरव प्रदान किया।
संस्था के पदाधिकारियों ने अपने संयुक्त शुभकामना संदेश में कहा कि हम कामना करते हैं कि आपकी यह अनवरत साहित्य सेवा समाज निर्माण और निर्धन वर्ग के उत्थान में सदैव सहयोगी बनी रहे।
जितेन्द्र उदयसिंह पंड्या, विधायक, विधानसभा बड़नगर ने कहा – “डॉ. कंचन जैन जी को साहित्य गौरव सम्मान मिलना पूरे बड़नगर क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। राजनीति से समाज नहीं बदलता, समाज साहित्य से बदलता है और आप वही कर रही हैं। आपको बधाई। आपका यशस्वी जीवन राष्ट्र निर्माण को समर्पित रहे।”
नीतेश जोशी (जय), निदेशक, डॉ. जयकिरण शोध शिक्षण संस्थान ने कहा – “डॉ. जयकिरण जी की स्मृति में बना हमारा संस्थान 2001 से साहित्य के सच्चे साधकों को खोजता है। डॉ. कंचन जी में हमें वही साधना दिखी। आपकी लेखनी में सरस्वती और समाज सेवा दोनों का संगम है। संस्थान आपके इस योगदान का सदैव ऋणी रहेगा।”
सनत जैन (परिश्रम), अध्यक्ष ने कहा – “साहित्य शिरोमणि या साहित्य गौरव उपाधि देना आसान है, पर उसे सार्थक करने वाला व्यक्तित्व मिलना कठिन है। डॉ. कंचन जी ने इस उपाधि को सार्थक कर दिया। हम आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।”
दिलीप पंचाक्षरी, सचिव ने कहा – “हिंदी दिवस केवल एक दिन नहीं, एक संकल्प है। डॉ. कंचन जैन जैसी साहित्यकार ही हिंदी को रोजगार और बाजार की भाषा से ऊपर उठाकर संस्कार की भाषा बनाती हैं।”
हितेश सोनी, कोषाध्यक्ष ने कहा – “आपकी साहित्य सेवा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे, यही हमारी शुभकामना है। संस्थान आपके साथ सदैव खड़ा है।”
अंत में संस्थान ने डॉ. कंचन जैन के सुदीर्घ, यशस्वी जीवन एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगल कामना की। यह सम्मान समारोह बड़नगर में हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक समृद्धि के उत्सव के रूप में मनाया गया, जिसकी गूंज अब अलीगढ़, उत्तर प्रदेश से लेकर उज्जैन तक सुनाई दे रही है।




