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लेख: पीढ़ियों के बीच बढ़ती खामोशी – लेखक: राजेश कुमार ‘राज’
आज जब पुराना वक़्त याद आता है तो बरबस एक दृश्य ऑंखों के सामने तैर जाता है जिसमें गाॅंव…
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जीवन का आधार: प्रेम, संवेदना और रिश्ते’ -डो. दक्षा जोशी’निर्झरा’ अहमदाबाद,गुजरात।
मानव जीवन की वास्तविक सुंदरता रिश्तों की गहराई में निहित है, और इन रिश्तों की आत्मा ‘प्रेम’ तथा ‘संवेदना’…
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मेरे हीरो मेरे पापा — डॉ संजीदा खानम’शाहीन
क्या कहूँ पापा के लिये अल्फाज नही है नि:शब्द हु पापा के लिये जज्बात नही है। पूरा का पूरा…
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