जीवन का आधार: प्रेम, संवेदना और रिश्ते’ -डो. दक्षा जोशी’निर्झरा’ अहमदाबाद,गुजरात।

मानव जीवन की वास्तविक सुंदरता रिश्तों की गहराई में निहित है, और इन रिश्तों की आत्मा ‘प्रेम’ तथा ‘संवेदना’ हैं। रिश्ते केवल रक्त संबंध या सामाजिक ताने-बाने से नहीं बनते, बल्कि वे दो हृदयों के बीच का भावनात्मक सेतु हैं।
आज की यांत्रिक और भागदौड़ भरी ज़िंदगी में रिश्ते अक़्सर औपचारिकताओं और स्वार्थ की भेंट चढ़ रहे हैं। जब रिश्तों में से निश्छल प्रेम गायब हो जाता है, तो वे केवल एक समझौता बनकर रह जाते हैं। संवेदना वह सूक्ष्म तत्त्व है जो हमें दूसरों के दुःख-सुख को महसूस करने की शक्ति देता है। बिना संवेदना के कोई भी रिश्ता खोखला और बेजान है।
यदि हमें समाज को बिखरने से बचाना है, तो रिश्तों को भौतिकता की कसौटी पर तौलना बंद करना होगा। एक-दूसरे के प्रति करुणा, आपसी समझ और बिना शर्तों का प्रेम ही रिश्तों में नई ऊर्जा फूंक सकता है। भावनाहीन संवाद केवल शोर है; सच्चा रिश्ता वही है जहाँ मौन भी गहरे प्रेम से गूँजता है।
-डो. दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद,गुजरात।




