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साहित्य संगम मंच की मई मास की मासिक गोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न

दिल्ली। साहित्य और संवेदनाओं से सराबोर साहित्य संगम मंच की मई मास की मासिक गोष्ठी अत्यंत गरिमामय एवं सफल वातावरण में संपन्न हुई। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध साहित्यकार अलका सिन्हा जी रहीं, जबकि अध्यक्षता शिखा खुराना जी ने की। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन सुनीला नारंग द्वारा तथा संयोजन अलका गर्ग द्वारा किया गया।
गोष्ठी का शुभारंभ मंच की संस्थापिका शिखा खुराना ने मुख्य अतिथि अलका सिन्हा जी का आत्मीय स्वागत करते हुए किया। स्वागत उद्बोधन के पश्चात संचालन का दायित्व सुनीला नारंग जी को सौंपा गया, जिन्होंने अपनी सहज, प्रभावपूर्ण एवं ऊर्जावान शैली से पूरे कार्यक्रम को सुंदर प्रवाह प्रदान किया।
कार्यक्रम का मंगलाचरण मैत्रेयी त्रिपाठी द्वारा मधुर स्वर में प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने वातावरण को पूर्णतः साहित्यिक एवं आध्यात्मिक भावों से आलोकित कर दिया। इसके पश्चात प्रतिभागियों — मीरा सजवान, सीमा पुरबा, मैत्रेयी त्रिपाठी, पूनम भारद्वाज, गणपत सिंह भदोरिया, मधु मंगल सिंह एवं सुषमा मेहरोत्रा ने क्रमशः अपनी भावपूर्ण एवं विविध विषयों पर आधारित रचनाओं की प्रस्तुति देकर गोष्ठी को बहुरंगी साहित्यिक आयाम प्रदान किए।
प्रतिभागियों की रचनाएं कुछ इस प्रकार थीं

मीरा सजवान जी
कलिकाल है ये कैसा क्यूँ घुल गया जहर हवा में।
राम की पावन धरा पर भाई,भाई से ही लड़ रहा है।

सीमा पुरबा जी
मै मजबूर हूँ , हाँ मै मजदूर हूँ ।
मै मजबूर हूँ , हाँ मैं मजदूर हूँ ।

मैत्रेयी त्रिपाठी जी
ज़ल रही है शमा,पर अँधेरा घना ।
हो रहा है तिमिर पर पतंगा फ़ना ।

पूनम भारद्वाज जी
क्यों हर समय दुत्कारी जाती हैं औरतें।
नासमझ कमअक्ल कह पुकारी जाती हैं औरतें।

गणपत सिंह भदोरिया जी
लबों तक बात जो आए, ज़बां न बोल पाती है।
नयन से नयन मिलते ही, नज़र वह बोल जाती है।

मधु मंगल सिंह जी
झूठे जलवे दिखाने से क्या ….फायदा,
जले दिल को जलाने से क्या .फायदा।

एवं सुषमा मेहरोत्रा जी
तोड़ना चाँद – तारे जरूरी नहीं,
माँग सितारों से भरना जरूरी नहीं,

अलका गर्ग जी
सदा से सुना है नारी,नर पे सदा ही भारी।
फिर क्यों कटी बेचारी..बात ये बताइए।

सुनीला नारंग जी
कैद रहना चाहते थे क्यों रिहाई दे रहे
हमको तुम करके रिहा अब क्यों जुदाई दे रहे

शिखा खुराना जी
मैं उसकी परछाई में, बस एक छुपा हुआ सा डर थी,
उसे खो देने के डर से मैं खुद से हुई बेख़बर थी।

संचालन के दौरान सुनीला नारंग जी ने सभी रचनाकारों का अभिनंदन करते हुए परिवार विषय पर लिखे अपने सुंदर दोहे समर्पित किए, जिन्हें सभी ने अत्यंत सराहा। प्रत्येक प्रस्तुति में भाव, संवेदना, सामाजिक सरोकार और सृजनात्मकता का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
गोष्ठी के अंत में मुख्य अतिथि अलका सिन्हा जी ने सभी रचनाओं पर अत्यंत सूक्ष्म एवं समीक्षात्मक टिप्पणी प्रस्तुत करते हुए रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने अपने सारगर्भित सुझावों एवं साहित्यिक मार्गदर्शन से सभी प्रतिभागियों को नई ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान की।
अंततः शिखा खुराना ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं श्रोताओं का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया तथा इसी के साथ यह गरिमामयी साहित्यिक गोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
यह आयोजन साहित्य, आत्मीयता और सृजनशीलता का सुंदर संगम बनकर सभी के हृदय में मधुर स्मृतियाँ छोड़ गया।

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