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मानवतावाद का पाठ पढ़ें – निबंध लेख — सुमन दूबे साऊंखोर बड़हलगंज गोरखपुर

मनुष्य जीवन ईश्वर की सबसे अनमोल देन माना जाता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सफल बनने का सपना देखता है। कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, कोई कलेक्टर या आईएएस अधिकारी। किंतु इन सभी सपनों से पहले एक बात सबसे अधिक महत्वपूर्ण है—मानवता। यदि किसी व्यक्ति में मानवता नहीं है, तो उसकी सारी उपलब्धियाँ अधूरी हैं।
मानवता वह गुण है जो हमें दूसरों के दुःख को समझना, उनकी सहायता करना और सभी के प्रति प्रेम, दया तथा सम्मान का भाव रखना सिखाती है। एक सच्चा मनुष्य वही है जो अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और मानव कल्याण के बारे में सोचता है। इसलिए हमें पहले मानवता का पाठ पढ़ना चाहिए, उसके बाद बड़े पदों और सफलताओं के सपने देखने चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति आईएएस अधिकारी, कलेक्टर या किसी उच्च पद पर पहुँच जाए, लेकिन उसमें करुणा, संवेदना और सेवा की भावना न हो, तो उसका पद समाज के लिए उतना उपयोगी नहीं होगा। वहीं एक मानवतावादी व्यक्ति अपने पद और शक्ति का उपयोग जनकल्याण के लिए करता है और लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
महान व्यक्तियों का जीवन हमें यही शिक्षा देता है कि पहले अच्छा इंसान बनना आवश्यक है। मानवता ही मनुष्य की सबसे बड़ी पहचान है। पद, प्रतिष्ठा और धन समय के साथ बदल सकते हैं, लेकिन मानवता का
मूल्य सदैव बना रहता है।
अतः हमें जीवन में यह संकल्प लेना चाहिए कि हम पहले मानवता के गुणों को अपनाएँगे, एक अच्छे मनुष्य बनेंगे और उसके बाद किसी बड़े पद या सफलता की ओर बढ़ेंगे। जब मानवता और सफलता साथ चलती हैं, तभी जीवन वास्तव में सार्थक और महान बनता है।

सुमन दूबे साऊंखोर
बड़हलगंज गोरखपुर

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