Welcome to इंडिया जागरण टुडे   Click to listen highlighted text! Welcome to इंडिया जागरण टुडे
Uncategorized

समरसता का स्वप्न — कविता साव पश्चिम बंगाल

काश ऐसा दिन आए जब मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और गुरुद्वारे केवल पूजा के स्थान न रहकर मानवता के मिलन केंद्र बन जाएँ। हनुमान मस्जिद में सम्मानित हों, कृष्ण चर्च में प्रेम के प्रतीक बनकर विराजें, और जीसस ठाकुरद्वारे में करुणा का संदेश दें। तब लोगों को यह समझ में आए कि ईश्वर अनेक रूपों में दिखाई दे सकता है, पर उसका संदेश एक ही है—प्रेम, दया और भाईचारा।
यदि अभिवादन का उत्तर धर्म देखकर नहीं, बल्कि आत्मीयता से दिया जाए, यदि राम और अल्लाह के नाम पर लोग एक-दूसरे से गले मिलें, तो समाज में फैली कटुता और संघर्ष स्वतः समाप्त हो जाएँ। तब जाति, पंथ और संप्रदाय के आधार पर खड़ी की गई दीवारें ढहने लगेंगी।
आज मानवता के सामने गरीबी, सीसी अशिक्षा, बेरोज़गारी और असमानता जैसी अनेक चुनौतियाँ हैं। यदि लोग धर्म के नाम पर लड़ने के बजाय इन समस्याओं से लड़ें, तो देश का वास्तविक विकास संभव है। लेकिन दुर्भाग्य से हम अक्सर रंग, जाति, धर्म और पहचान के छोटे-छोटे दायरों में उलझकर रह जाते हैं।
सत्य यह है कि सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी, जल और वायु किसी एक धर्म के नहीं हैं। जैसे प्रकृति सबकी है, वैसे ही ईश्वर भी सबका है। जब हम इस सरल सत्य को स्वीकार कर लेंगे, तब समाज में समरसता का वातावरण बनेगा।
इतिहास में अनेक महापुरुषों ने लोगों को जोड़ने का प्रयास किया, परंतु संकीर्ण सोच और आपसी विवादों ने उनके सपनों को पूरी तरह साकार नहीं होने दिया। फिर भी आशा का दीप बुझना नहीं चाहिए। शायद एक दिन ऐसा आए जब होली और ईद, दीपावली और क्रिसमस, सब केवल त्योहार न होकर मानवता के उत्सव बन जाएँ।
यह अभी एक कल्पना लग सकती है, लेकिन यदि हम अपने मन की गाँठें खोल दें, पूर्वाग्रह छोड़ दें और इंसान को इंसान समझना सीख लें, तो यह कल्पना एक दिन यथार्थ भी बन सकती है। तब भारत केवल अनेक धर्मों का देश नहीं, बल्कि विविधता में एकता का सर्वोत्तम उदाहरण होगा।
कविता साव
पश्चिम बंगाल

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!