संस्मरण: मुसीबतों के काले बादल लेखक: राजेश कुमार ‘राज’

बात वर्ष 2023 के जुलाई माह की है। दिल्ली के एक निजी अस्पताल में मेरा बवासीर का ऑपरेशन हुआ। जो भाग काट कर निकाला गया, अस्पताल ने उसकी बायोप्सी (कैंसर की जांच) भी कराई। 13 जुलाई को सर्जरी हुई थी और 18 जुलाई को बायोप्सी की रिपोर्ट भी आ गई। रिपोर्ट में वही निकला जिसका मुझे पहले से अंदेशा था। मेरे गुदा मार्ग में कैंसर का संक्रमण पाया गया था। मैं अपने परिवार के तीन लोग पहले ही कैंसर से खो चुका था। अतः बीमारी की भयावहता का मुझे अंदाजा था। फलस्वरूप मैं ‘पैनिक स्टेट’ में नहीं गया। अब रेडियोथिरेपी और कीमोथेरेपी का कष्टदायक दौर शुरू होना था।
एक सीजीएचएस लाभार्थी होने के कारण मुझे इलाज के लिए अपनी डिस्पेंसरी से इलाज और कीमोथेरेपी ड्रग की अनुमति की आवश्यकता थी। इस प्रक्रिया ने मुझे बड़ा हताश किया। डाक्टर अनुमति-पत्र में हर बार कोई न कोई कमी छोड़ देते थे। कमियाॅं ठीक कराने के लिए मैं अस्पताल और डिस्पेंसरी के चक्कर काटता रहा। अंततोगत्वा, मुझे सही अनुमति मिली और 1 अगस्त 2023 से मेरी रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी साथ-साथ आरम्भ हुई। इस इलाज के दुष्परिणाम भी मुझे भोगने पड़े। मुॅंह में छाले पड़ गए, दस्त लग गए, हीमोग्लोबिन और प्लेटलेट्स गिर गए। कई बार तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ी कि मुझे इमरजेंसी में भर्ती होना पड़ा। यह समझिए कि मौत के मुॅंह से वापस आया हूॅं। खैर, 23 सितम्बर 2023 के दिन मेरा इलाज पूरा हो गया। मेरा जीवन बच गया और इस प्रकार मुसीबतों के काले बादल मेरे जीवन से छॅंट गए।
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