क्या आप भी गर्व कर सकते हैं:एक प्रश्न – सीमा शुक्ला चांद

जब पिता कमाता है मां घर सम्हालती है तब उनकी संतान राजकुमार और राजकुमारी मां कहलाती हैं। फिर चाहे वो माता पिता किसी भी आर्थिक स्थिति के हों। एक मजदूर दिन रात मजदूरी करके भी अपने बच्चे की हर ख्वाहिश पूरा कर उसे राजकुमार और राजकुमारी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता। जब वो अपने फटे जूते या कमीज की जगह अपने बच्चों को सजा संवरा हुआ देखता है तब वह अपने सारे दर्द अपनी सारी कमियां भूल जाता है। उसी तरह से मां भी अपने बच्चों की पसंदीदा चिज़ उनकी थाली में परोस स्वंय को धन्य मानती है। हर जनक
अपने द्वारा संतान को जो भी सुविधा उपलब्ध कराता है वो उसके लिए आनंदित और गर्वित होता है। पर क्या संतान कभी अपने किसी कर्म के लिए अपने आप पर अभिमान कर पाती है। आज की भागती दौड़ती दुनिया में प्रत्येक जनक हर आर्थिक सामाजिक स्थिति वाला एकाकी जीवन जिनके पर मजबूर हैं। संतानों को उनकी पढ़ाई भविष्य की चिंता मां बाप से दिन प्रतिदिन दूर बहुत दूर करती जा रही है। आजकल अधिकांश संतानों के लिए जनक बस एक जवाबदारी या बोझ बनकर रह गए हैं। उनकी इच्छाओं तो बहुत दूर उनके हाल चाल पूछने का वक्त भी संतानों के पास नहीं है। आज सम्पन्न जनक केयर टेकरो पर मध्यम वर्गीय वृद्ध आश्रमो में और कमजोर वर्गीय सड़कों के किनारे ही देखने को मिलते हैं। सोशल मीडिया में मदर्स डे फादर्स डे पर इनके साथ कुछ पल बिताए गए अनगिनत छायाचित्र तथा विडियो अक्सर मिल जाते हैं।
आप जानते हैं जिन जनक ने आपको राजकुमार और राजकुमारी की तरह पाला है वे भी राजा और रानी की तरह जीवन व्यतीत करना डिसर्व करते हैं। उन्हें राजा रानी की तरह रखने के लिए बहुत कुछ नहीं थोड़ा सा कुछ चाहिए। आप यदि साथ में निवासरत हैं तो कुछ पल उनके पास बैठिए बिना मोबाइल या अन्य यंत्र के उनके हाथ पैरों का स्पर्श किजिए अपने शीश पर उनका हाथ रखना लिजिए। देखिए आपकी हर चिंता को थकान को वो यूं ही हर लेंगे। यदि आप किसी दूर निवासरत हैं तो सुबह शाम दो पल के लिए बात किजिए उनके स्वास्थ्य भोजन दिनचर्या के बारे में पूछिए। जिस दिन उनके गंभीर रूप से बिमार होने पर आप उन्हें अच्छी सुविधाओं के साथ अस्पतालों में रखे और उन्हें ये चिंता ना हो की अस्पताल का खर्चा कौन और कैसे उठाएगा समझ लिजिए आपने उन्हें राजा रानी बना दिया। यह वह वक्त है जब आप अपने कर्म पर गर्व कर सकते हैं। जिस पल आपके जनक घर में चलते हुए बिजली के उपकरणों का प्रयोग बिना बिजली के बिल भुगतान की चिंता के करें तब आप गर्व कर सकते हैं। जिस पल उन्हें सामाजिक व्यवस्था में लेने दें करने के लिए आपको यह ना बताना पड़े कितना और कैसे करना है आप गर्व कर सकते हैं।
जानते हैं इन सभी और इस तरह की अन्य व्यवस्थाओं को स्थापित कर अपने अपने जनक को राजा रानी बना दिया है। अब उन्हें आप पर गर्व और भरोसा है की अब आप सब कुछ संभाल चुके हैं। यदि आपके जनक में आप ये भरोसा उत्पन कर चुके हैं तो स्वंय पर आप भी गर्व कर सकते हैं आपने अपना कर्तव्य पूरा करने में कुछ हद तक सक्षम हो ग ए हैं और यदि आपने आज तक ऐसा कोई कार्य नहीं किया है तो प्रयास करें आपके जनक को भी राजा रानी की तरह रहने का अधिकार है।सीमा शुक्ला चांद




