अगर पति पत्नी एक दूसरे की डायरी पढ़ लें तो -सुनीता तिवारी”सरस”

घर में उस दिन अजीब सी खामोशी थी, लेकिन भीतर ही भीतर एक तूफान उठने को तैयार था। हुआ यूँ कि सफाई करते-करते पत्नी को पति की पुरानी डायरी मिल गई और जिज्ञासा नाम की चिड़िया फुर्र से उसके मन में आ बैठी। उधर पति ने भी मौका देखकर पत्नी की डायरी पर हाथ साफ कर लिया। अब दोनों के पास एक-दूसरे के राज़ थे
और चेहरे पर मासूमियत ऐसे जैसे कुछ हुआ ही न हो।
शाम को चाय के वक्त पत्नी ने मुस्कुराते हुए पूछा, तो जनाब, ऑफिस में इतनी मेहनत होती है कि शर्मा जी की चाय भी पीनी पड़ती है?
पति चौंका, पर संभलते हुए बोला, अरे, वो तो बस यूँ ही… और आप बताइए आपकी डाइट कब से शुरू हो रही है? डायरी में तो हर सोमवार लिखा है!
पत्नी ने भौंहें चढ़ाईं, “कम से कम मैं कोशिश तो करती हूँ आप तो ‘आज से गुस्सा कम करूंगा’ पिछले पाँच साल से लिख रहे हैं!
पति ने भी पलटवार किया, और आप ‘आज से बचत करूंगी लिखकर हर महीने शॉपिंग कर आती हैं!
अब माहौल हल्की नोकझोंक से भर गया। दोनों एक-दूसरे के लिखे वाक्य पढ़-पढ़कर तंज कसने लगे।
वाह! कॉलेज वाली सीमा आज भी याद है आपको! पत्नी ने आंखें तरेरी।
पति मुस्कुराया, और आपके सीक्रेट क्रश का क्या? नाम तो बड़े प्यार से लिखा है आपने!
कुछ पल के लिए दोनों चुप हो गए फिर अचानक दोनों हँस पड़े।
पति बोला, अरे, ये डायरी भी न
दिल की बातों का कबाड़खाना है।
पत्नी ने भी हँसते हुए कहा, हाँ और अगर इन्हें पढ़ लिया जाए तो शादी का सस्पेंस खत्म हो जाए!
फिर दोनों ने अपनी-अपनी डायरी बंद की और एक छोटा सा समझौता कर लिया,
कुछ बातें लिखने के लिए होती हैं, और कुछ सिर्फ महसूस करने के लिए, उन्हें पढ़कर तौलना नहीं चाहिए।
उस दिन के बाद दोनों ने एक-दूसरे की डायरी पढ़ना तो बंद कर दिया, लेकिन एक-दूसरे को थोड़ा और समझना शुरू कर दिया।
अब तंज कम और मुस्कान ज्यादा थी दोनों को समझ आ गया था कि कुछ निजी चीजें सिर्फ शौकिया होती है उनका कोई वजूद नहीं।
आपसी प्रेम एक दूसरे के सम्मान में ही है।
सुनीता तिवारी”सरस”




