दुनिया के मेले में खो गये– नीलम सोनी फॉर्म ब्यावर

दुनिया के मेले में खो गये है खुदको भी अब पहचान नही पा रहे है। आत्मिता तो अब कही भी बची नही है सब के सब एकला चलो की चाल चल रहे है। किसी के पास भी समय नही है की दो बोल प्रेम भाव के अपने बड़े बूढ़ो से बैठकर बोल सके और न ही बच्चों को देख सकते है की क्या कर रहा है कैसे पढ़ा ई लिखाई उसकी चल रही है। क्या कर रहा है उससे कोई लेना देना नही। उसके लिए एक टूशन टीचर या कोचीन क्लास आदि लगा दी है और आधुनिक यंत्र आदि दिलवा दिया परंतु माँ बाप को अपने बच्चे को प्यार आदि देने का समय नही है। घर में आया लगा दी उसकी देख रेख के लिए डिब्बे का दूघ और खाने को बाजारों चीजे उसके लिए रख दी। देखते देखते वो बड़ा हो जाता है कुछ समय उपरांत माँ बाप को दोस्त समझने लगता है और आगे की पढ़ाई के लिए बहार चला जाता है। एक बार बहार गया तो फिर वो कभी लौटकर नही आता फिर सिर्फ आप उसके माँ बाप कहने को होते है क्योंकि आगे के सारे निर्यण अब उसे स्वयं ही लेना है। यदि वो विदेश चला गया तो आप सारे रिश्तेदारों दोस्तो को उसकी कामयाबी के बारे में बड़ा चढ़ाकर बताओगे परंतु अंतरात्मा से यदि स्वयं महसूस करोगे तो खुद पर रोओंगे। क्योंकि आपको पता है की अब आगे क्या होने वाला है। आपको सिर्फ हर महीने कुछ बर्षो तक पैसे आपके खाते में आते रहेगे। परंतु दिल का सुकून आपको नही मिलेगा। ऐसे लगेगा की किराये की कोक से बच्चे को पैदा कर के उसे छोड़ दिया। न तो वो आपके दुख सुख मे शामिल है और न वो आपके दुख को महसूस कर रहा क्योंकि उसमें आत्मिता माँ बाप के लिए नही है। इसका कारण आपने उसे लाड़ प्यार नही दिया। अब वो आप से इतना दूर है की आप उसे कल्पनाओं में रहकर बात कर सकते हो। न उसे अपने कर्तव्य याद है और न आपको अपने पुत्र का मोह। बस यदि याद है तो सिर्फ पैसा पैसा और पैसा। इसकी पैसे के चक्कर में तुमने अपने माँ बाप को छोड़ था और उसी पैसे ने तुमसे तुम्हारा बेटा दूर कर दिया। दुनिया के इस झमेले में किसी को कुछ नही मिलता, मिलता है तो अकेलापन अपनों से दूरियाँ क्योंकि समय रहते आप कही आये गये नही, आपके रिश्ते भी सिर्फ कागजो तक ही सीमित रहे। हाँ पर आप को जो मिला उपहार अपनी इस करनी का वो है पैसा बस और कुछ नही। ये कलयुग है भाई यहाँ कोई किसी का नही है। पहले के लोग आज के लोगों से कम पढ़े लिखे होते हुए भी बहुत समझदार व्यवहारिक और आत्मिता से भरे होते थे। पैसे की भी कद्र करते थे और सबसे रिश्तें आदि भी निभाते थे। धर्म ध्यान और दान आदि भी करते थे जिससे समाज देश में उनका नाम होता था। परंतु आज कल ये सब खत्म हो गया है। इसलिए कहता हूँ की हम आप खो गए है दुनिया के मेले में जिसे अब खोज पाना बहुत ही मुश्किल है। मेरा लेख किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुॅचाने के लिए नही है। यदि ठेस लगे तो मुझे क्षमा कर देना नादान समझकर। नीलम सोनी फॉर्म ब्यावर




