गोल्डन इरा बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने डॉ. पल्लवी सिंह “अनुमेहा” को ‘मुंशी प्रेमचंद सृजन लेखन–2026’ सम्मान से किया सम्मानित

बैतूल । हिंदी साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए स्व नरेंद्र सिंह पुंडीर की सुपुत्री एवं समकालीन साहित्यकार, कवयित्री, लेखिका, समीक्षक डॉ. पल्लवी सिंह “अनुमेहा” को उनके उत्कृष्ट साहित्य-सृजन और हिंदी भाषा के प्रति समर्पित योगदान के लिए *गोल्डन इरा बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा “मुंशी प्रेमचंद सृजन लेखन–2026″* सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उनकी साहित्यिक साधना, सृजनात्मक निरंतरता तथा समाजोन्मुख लेखन को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण स्वीकृति माना जा रहा है।
डॉ. पल्लवी सिंह “अनुमेहा” ने हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं—कविता, कहानी, आलोचना, शोध एवं वैचारिक लेखन—में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं की गहराई, स्त्री-अनुभवों की सशक्त अभिव्यक्ति, सामाजिक सरोकार, नैतिक चेतना, प्रकृति के प्रति आत्मीय दृष्टि तथा बदलते समय के प्रश्नों का गंभीर और संतुलित विवेचन देखने को मिलता है। उनकी लेखनी पाठकों को केवल भावनात्मक रूप से स्पर्श नहीं करती, बल्कि उन्हें विचार करने और समाज के प्रति अपनी भूमिका को समझने के लिए भी प्रेरित करती है।
साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को उनकी प्रकाशित कृतियों ने भी नई पहचान दी है। उनकी रचनाएँ संवेदनशीलता और वैचारिक परिपक्वता का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। शोधपरक लेखन और आलोचना के क्षेत्र में भी उनका कार्य हिंदी साहित्य की गंभीर परंपरा को समृद्ध करने वाला माना जाता है।
गोल्डन इरा बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड द्वारा प्रदान किया गया “मुंशी प्रेमचंद सृजन लेखन–2026” सम्मान इस विश्वास को पुष्ट करता है कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी साधन भी है। मुंशी प्रेमचंद की यथार्थवादी और जनोन्मुख साहित्यिक परंपरा को स्मरण करते हुए प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान उन रचनाकारों को समर्पित है, जिनकी लेखनी समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय भूमिका निभाती है।
इस सम्मान की घोषणा के पश्चात साहित्य, शिक्षा और संस्कृति जगत से जुड़े अनेक विद्वानों, रचनाकारों, शोधार्थियों तथा पाठकों ने डॉ. पल्लवी सिंह “अनुमेहा” को शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए इसे हिंदी साहित्य के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि बताया। उनका मत है कि डॉ. “अनुमेहा” की सृजन-यात्रा नई पीढ़ी के लेखकों को गंभीर, उत्तरदायी और मूल्यपरक लेखन के लिए प्रेरित करती रहेगी।
डॉ. पल्लवी सिंह “अनुमेहा” ने इस सम्मान को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न मानते हुए इसे हिंदी भाषा, अपने पाठकों, गुरुजनों, परिवार तथा उन सभी साहित्य-प्रेमियों को समर्पित बताया, जिनके विश्वास और स्नेह ने उनकी लेखनी को निरंतर ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए एक नई जिम्मेदारी है, जो उन्हें और अधिक ईमानदारी, संवेदनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ सृजन करते रहने की प्रेरणा देता रहेगा।
हिंदी साहित्य जगत में इस सम्मान को डॉ. पल्लवी सिंह “अनुमेहा” की सृजनशील यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। साहित्यिक समुदाय का विश्वास है कि उनकी सशक्त लेखनी भविष्य में भी हिंदी साहित्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




