Uncategorized

नन्हा जीवन – लघुकथा- सुनीता तिवारी”सरस” स्वरचित

 

गांव के किनारे एक बूढ़ा माली रहता था,नाम था हरिराम। उम्र ढल चुकी थी, मगर आंखों में अब भी हरियाली के सपने बसे थे। उसका एक ही शौक था, पेड़ लगाना और उन्हें बच्चों की तरह पालना।

एक दिन उसका छोटा पोता मोहन उसके पास आया। उसने देखा कि दादा अपने हाथों में मिट्टी और एक छोटा-सा पौधा लिए बहुत ध्यान से उसे देख रहे हैं।

मोहन ने पूछा,दादा, आप इसे इतने प्यार से क्यों पकड़े हैं?

हरिराम मुस्कुराए और बोले, “बेटा, ये सिर्फ पौधा नहीं है, ये भविष्य है… हमारा और इस धरती का।”

मोहन को बात समझ नहीं आई, लेकिन उसने दादा के साथ मिलकर उस पौधे को घर के सामने रोप दिया। हर दिन दोनों उसे पानी देते, उससे बातें करते, जैसे वो कोई जीवित साथी हो।

समय बीतता गया… छोटा पौधा धीरे-धीरे एक घने पेड़ में बदल गया। उसकी छांव में गांव के बच्चे खेलने लगे, पक्षियों ने उसमें घोंसले बना लिए, और गर्मियों में वही पेड़ राहगीरों को ठंडी छाया देने लगा।

एक दिन हरिराम बहुत बीमार पड़ गए। उन्होंने मोहन का हाथ पकड़कर कहा,
“याद रखना बेटा, जिस तरह हमने इस पौधे को संभाला, वैसे ही प्रकृति को भी संभालना… क्योंकि यही हमें जीवन देती है।”

कुछ ही दिनों बाद हरिराम इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनकी सीख मोहन के दिल में बस गई।

अब मोहन बड़ा हो चुका था। वह हर साल कई नए पौधे लगाता और बच्चों को सिखाता
“एक छोटा-सा पौधा, अगर प्यार से पाला जाए, तो पूरी दुनिया को जीवन दे सकता है।”

और इस तरह, उन दो हथेलियों में सहेजा गया नन्हा पौधा, एक पूरी पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गया।

संदेश:
छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव लाते हैं। प्रकृति को बचाना, दरअसल अपने भविष्य को बचाना है।

सुनीता तिवारी”सरस”
स्वरचित

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!