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सेप्टोलेसेंट’ -डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’ अहमदाबाद,गुजरात।

 

(Septolescent) एक बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक आधुनिक शब्द है, जो अंग्रेजी के दो शब्दों—’सेप्टूजेनेरियन’ (Septuagenarian यानी 70 वर्ष की आयु पार कर चुका व्यक्ति) और ‘एडोलसेंट’ (Adolescent यानी किशोर) से मिलकर बना है।
यह शब्द उन पुरुषों या महिलाओं के लिए उपयोग किया जाता है जिनकी उम्र 70 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है, लेकिन उनका दिल, ऊर्जा और जीवन के प्रति उत्साह किसी युवा या किशोर जैसा होता है। वे पारंपरिक तरीक़े से बुढ़ापे को स्वीकार नहीं करते, बल्कि जीवन को नए जोश और सकारात्मकता के साथ जीते हैं।
सेप्टोलेसेंट जीवनशैली की मुख्य विशेषताएं:-
सक्रिय और ऊर्जावान रहना: इस उम्र में भी वे शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहते हैं। वे नए काम सीखतें हैं, यात्राएं करते हैं और ख़ुद को किसी न किसी रचनात्मक कार्य में व्यस्त रखते हैं।
सकारात्मक दृष्टिकोण: वे उम्र बढ़ने को एक अभिशाप नहीं बल्कि जीवन के एक ख़ूबसूरत पड़ाव के रूप में देखते हैं। उनके पास जीवन का लंबा अनुभव और ज्ञान होता है, जिसे वे किशोरों जैसी जिज्ञासा के साथ जोड़ते हैं।
स्वास्थ्य के प्रति सचेत: एक ‘सेप्टोलेसेंट’ व्यक्ति अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखता है। नियमित सैर करना, संतुलित आहार लेना और छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं को अपनी दिनचर्या में बाधा न बनने देना उनकी आदत होती है।
सामाजिक जुड़ाव: वे अपने परिवार, बच्चों, पोते-पोतियों और दोस्तों के साथ मज़बूत और खु़शनुमा संबंध बनाकर रखते हैं। दोस्तों से मिलना-जुलना और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना उन्हें मानसिक रूप से तरो-ताजा़ रखता है।
छोटी-छोटी खु़शियों में आनंद: वे जीवन की बड़ी और जटिल महत्त्वाकांक्षाओं के पीछे भागने के बजाय, रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीज़ों (जैसे एक कप चाय, उगता हुआ सूरज या अपनों की हंसी) में ख़ुशी तलाशते हैं।
संक्षेप में, सेप्टोलेसेंट होना केवल एक उम्र नहीं बल्कि जीने का एक शानदार तरीक़ा है, जो सिखाता है कि उम्र केवल एक संख्या है और उत्साह तथा जीने की चाहत हर उम्र में जवान रह सकती है।

-डॉ. दक्षा जोशी’निर्झरा’
अहमदाबाद,गुजरात।

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