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निरंतरता से निखरती है व्यक्तित्व की वास्तविक क्षमता – अभय जैन

 

जीवन में सफलता और असफलता दोनों ही स्थायी नहीं होतीं। इसलिए व्यक्ति को हर परिस्थिति में निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। असफलताओं से घबराना नहीं चाहिए और न ही सफलताओं से अत्यधिक उत्साहित होकर रुक जाना चाहिए। लगातार सफलता मिलने पर पुरानी सफलताएँ छोटी लगने लगती हैं, वहीं लगातार असफलताएँ मिलने पर पहले की असफलताएँ भी कम महत्वपूर्ण प्रतीत होने लगती हैं। इसलिए जीवन में संतुलित दृष्टिकोण और निरंतर प्रयास ही आगे बढ़ने का सबसे बड़ा आधार हैं। अभय जैन ने बताया कि समय के साथ सुधार और परिवर्तन की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। इसका एक उदाहरण केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) है। वर्ष 1962 में स्थापित सीबीएसई ने लगभग 64 वर्षों बाद विद्यार्थियों की सुविधा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने का नया पैटर्न लागू किया। यह दर्शाता है कि समयानुकूल परिवर्तन और सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी निरंतर प्रयासों का परिणाम स्पष्ट दिखाई देता है। वर्ष 2026 में स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित स्वदेशी रॉकेट विक्रम-1 ने सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुँचकर इतिहास रचा। यह किसी निजी भारतीय कंपनी द्वारा विकसित और प्रक्षेपित पहला रॉकेट है, जो निरंतर अनुसंधान और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है। अभय जैन ने महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का उदाहरण देते हुए बताया कि शुरुआती जीवन में उन्हें औसत विद्यार्थी माना जाता था, लेकिन उनकी अथाह जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और निरंतर प्रयासों ने उन्हें विश्व के महानतम वैज्ञानिकों में स्थान दिलाया। इससे स्पष्ट होता है कि जन्मजात प्रतिभा से अधिक महत्वपूर्ण निरंतर सीखने की इच्छा और कठिन परिश्रम है। उन्होंने कहा कि कीपैड मोबाइल से स्मार्टफोन और फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तक की यात्रा, कच्चे मकानों से गगनचुंबी इमारतों तक का विकास तथा मानव सभ्यता की प्रगति ये सभी निरंतर प्रयास, सुधार और नवाचार के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। आधुनिक न्यूरोसाइंस के अनुसार लगभग 30 वर्ष की आयु के बाद भी मानव मस्तिष्क अपने अनुभवों और सीख के आधार पर स्वयं को बदलने और विकसित करने की क्षमता रखता है। इसका प्रेरणादायक उदाहरण अमिताभ बच्चन हैं, जो 83 वर्ष की आयु में भी पूरे उत्साह और सक्रियता के साथ कार्य कर रहे हैं। अभय जैन ने कहा कि किसी भी कार्य में सफलता या असफलता व्यक्ति के स्पष्ट लक्ष्य, सुनियोजित योजना, कड़ी मेहनत, निरंतरता, कौशल, ज्ञान, सकारात्मक दृष्टिकोण तथा बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर करती है।उन्होंने अंत में कहा कि जीवन में पूर्णता जैसी कोई स्थायी स्थिति नहीं होती। इसलिए सफलता और उत्कृष्ट जीवन के लिए हमेशा सीखते रहना, स्वयं को बेहतर बनाते रहना और निरंतर सुधार की गुंजाइश बनाए रखना ही सच्ची प्रगति का मार्ग है

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