समय का फेर- राजेन्द्र परिहार”सैनिक “

राजा को रंक,रंक को राजा बना दे अज़ब समय का फेर।समय की शाश्वत धारा का रुख़, बदलते लगती नहीं देर।
रमेश आज बहुत खुश था,उसे अपनी सच्चाई अपनी ईमानदारी और कर्तव्य के प्रति समर्पण भाव का ईनाम मिला था।उसे आज कारखाने का मुख्य प्रबंधक बना दिया गया था। कुछ दिनों से कारखाने में पीतल और तांबे के पुर्ज़ों की लगातार चोरी की घटनाएं हो रही थी। रमेश कारखाने का सुपरवाइजर पद पर कार्यरत था। सबकी नजर रमेश के चरित्र पर संदेह कर रही थी और जो कार्मिक चोरियों में संलिप्त थे उन्होंने मालिक को रमेश के विरुद्ध भड़काना शुरू कर दिया था,धीरे-धीरे मालिक को भी रमेश पर ही संदेह होने लगा। एक दिन मालिक ने उसे अपनी केबिन में बुलाया और शालीनता
से पूछताछ की, मालिक को इतना भरोसा तो था कि रमेशलम्बे समय से कारखाने में काम कर रहा है और कभी ऐसी शिकायतें नहीं आई हैं। उसने रमेश को स्पष्ट रूप से कह दिया कि या तो सात दिन में इन चोरी की घटनाओं के बारे में पता लगाओ कि असली चोर कौन है..?? वरना नौकरी से हटा दिया जाएगा तुम्हें और चोरी का इल्ज़ाम तुम पर ही आएगा। रमेश ने मालिक को आश्वस्त किया कि सात दिन में असली चोरों को आपके सामने लाकर पेश कर दूंगा।
रमेश ने चुपचाप वहां वहां सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए, जहां जहां चोरियां हो रही थी। सीसीटीवी का संपर्क सीधा मालिक के कम्प्यूटर से जोड़ दिया। चोरी तो होनी ही थी, हुई भी और मालिक ने रमेश को बुलाकर कहा कि आज फिर तांबा पीतल चोरी हुआ है। रमेश ने शालीनता से कहा “मालिक चोरों का पता चल चुका है और सारे चोर आपके कम्प्यूटर में कैद हो गये हैं। मालिक ने तुरंत कम्प्यूटर खोलकर देखा तो वही
कर्मचारी चोरी करते स्पष्ट नज़र आ रहे थे, जो रोजाना मालिक को रमेश के विरुद्ध भड़का रहे थे। दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका था। मालिक ने तुरंत ही उन सब कर्मचारियों को बुलाया और पुलिस के हवाले कर दिया। मालिक ने रमेश की चतुराई और ईमानदारी से प्रभावित होकर कारखाने का मुख्य प्रबंधक नियुक्त कर दिया। समय का फेर देखिए कि जिस पर चोरी का संदेह था वो ही सबसे ईमानदार साबित हुआ और
पदोन्नति भी पा गया।
राजेन्द्र परिहार”सैनिक “




