संघर्ष से ही जीवन को दिशा और भाषा को पहचान मिलती है – डॉ. बाल गोपाल शर्मा

उदयपुर। विद्या भवन रुरल इंस्टिट्यूट के हिंदी विभाग एवं राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी सप्ताह का समापन सोमवार को साहित्यिक गरिमा एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।
समापन समारोह के मुख्य वक्ता अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, फलासिया डॉ. बाल गोपाल शर्मा (अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, फलासिया) ने हिंदी के संघर्ष और उसके निरंतर विकास की चर्चा करते हुए इसे अपने जीवन-संघर्ष से जोड़ा। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि जिस प्रकार व्यक्ति अपने जीवन में अनेक चुनौतियों और कठिनाइयों से गुजरकर अपनी पहचान बनाता है, उसी प्रकार हिंदी ने भी संघर्षों और अनेक उतार-चढ़ावों के बीच अपना व्यापक स्थान बनाया है।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जीवन में परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, निराशा को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। संघर्षों से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर सकारात्मक दृष्टि के साथ आगे बढ़ना ही सफलता का मार्ग है। उन्होंने हिंदी भाषा पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अपनी भाषा का सदैव सम्मान करना चाहिए तथा उसके साथ दूसरी भाषाओं को भी उतना ही सम्मान देना चाहिए।
उनके प्रेरक वक्तव्य ने विद्यार्थियों को हिंदी के प्रति सम्मान के साथ जीवन के प्रति सकारात्मक और संघर्षशील दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सरस्वती जोशी ने दिया। उन्होंने हिंदी सप्ताह के दौरान आयोजित विविध गतिविधियों का संक्षेप में उल्लेख करते हुए कहा कि सप्ताहभर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अपनी सृजनात्मक प्रतिभा, अभिव्यक्ति-कौशल और हिंदी के प्रति अनुराग को अभिव्यक्त किया।
इसअवसर पर पूर्व डायरेक्टर टी पी शर्मा एवं वाणिज्य संकाय की संकाय अध्यक्ष डॉ किरण आसनानी भी अपने विचार रखें। डॉ टी पी शर्मा छात्रों को हिंदी के प्रति रुचि रखने एवं इसकी उन्नति के लिए निरंतर प्रयास व्रत रहने की बात कहीं, वही डॉक्टर किरण असरानी ने कहा कि आज के दिन भाषा के प्रति बातें तो बहुत हो चुकी लेकिन हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम हमारे जीवन में हिंदी भाषा को अपने का पूरा प्रयास करेंगे।
आशु भाषण प्रतियोगिता में लक्षिता प्रथम, नित्या पालीवाल द्वितीय तथा सुहानी पालीवाल तृतीय रहीं। निबंध लेखन प्रतियोगिता में किरण जोशी प्रथम, मुस्कान द्वितीय तथा निधि जोशी तृतीय रहीं। सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में गुंजन कुंवर देवड़ा एवं अर्जुनलाल गमेती प्रथम तथा हर्ष भोई द्वितीय तथा हिमानी सोनी तृतीय रहें। कविता पाठ प्रतियोगिता में गुंजन कुंवर देवड़ा प्रथम, चेतन सिंह द्वितीय तथा रामसिंह तृतीय रहे।
विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समारोह का संचालन कार्यक्रम संयोजिका एवं हिंदी विभाग की सहायक आचार्य डॉ. निर्मला शर्मा ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों की सृजनात्मक उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर पठन-पाठन और साहित्य-सृजन के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने फोर्ट विलियम कॉलेज, प्रोफेसर गिलक्रिस्ट , लल्लू लाल, सदन मिश्र, राजा शिवप्रसाद सितारे हिंद, महावीर प्रसाद द्विवेदी सभी के हिंदी भाषा के प्रति योगदान को याद किया आवश्यकता सुमन अर्पित किए। समापन अवसर पर यह भाव विशेष रूप से उभरकर आया कि हिंदी सप्ताह सात दिनों का आयोजन भर नहीं, भाषा को जीवन, विचार और संवेदना से जोड़ने का एक सतत प्रयास है। विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता और उनकी उपलब्धियों ने इस आयोजन को सार्थकता प्रदान की। सप्ताह के प्रारंभ से लेकर आज समापन तक महाविद्यालय निर्देशिका प्रोफेसर कनिका शर्मा का मार्गदर्शन मिलता रहा। डॉ कंचन पानेरी, डॉ नीलू तिवारी, श्री लक्ष्मण सिंह राजपूत, डॉ हर्षित भटनागर, डॉ ज्योति कंठालिया आदि संकाय सदस्य उपस्थित रहे।




